
(आशीष कुर्ल) भोपाल। वी.एन. अंबाडे ने 1 अगस्त को मध्यप्रदेश के नए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) का पदभार संभाला।
इस संवाददाता से विशेष बातचीत में अंबाडे ने प्रदेश की हरित पट्टी और वन्यजीव संरक्षण को लेकर अपना दृष्टिकोण और दीर्घकालिक लक्ष्य साझा किए। उन्होंने बताया कि फिलहाल मध्यप्रदेश की हरित पट्टी लगभग 21 से 23 प्रतिशत है। “मेरा लक्ष्य है कि अगले दस वर्षों में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत से अधिक हो,” उन्होंने कहा।
पुरानी उपग्रह तस्वीरों का हवाला देते हुए अंबाडे ने चिंता जताई कि विकास कार्यों और पर्यावरणीय दबावों के चलते वन क्षेत्रों में लगातार कमी आई है। उन्होंने कहा, “वन्यजीवों के लिए उपलब्ध स्थान तेजी से घटा है। बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर वनों का विस्तार करना आवश्यक है। इससे न केवल वन्यजीवों को आवास मिलेगा बल्कि ग्रीनहाउस प्रभाव को कम करने में भी मदद मिलेगी।”
उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में चार वर्ष की प्रतिनियुक्ति के दौरान उनके प्रयासों से हरित आच्छादन 7 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत से अधिक हुआ। “मेरा वह अनुभव अब मध्यप्रदेश में भी उपयोगी साबित होगा,” उन्होंने जोड़ा।
राज्य की भौगोलिक महत्ता पर जोर देते हुए अंबाडे ने कहा कि कभी मध्यप्रदेश की सड़कों के किनारे पेड़ों की कतारें होती थीं। “लेकिन सड़कों के चौड़ीकरण के कारण इनमें से कई पेड़ काट दिये गये। अब बड़े पैमाने पर राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण करना बेहद जरूरी है,” उन्होंने कहा।
अंबाडे का एजेंडा विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित है। उनका दृष्टिकोण न केवल मध्यप्रदेश की जैव विविधता की रक्षा करेगा बल्कि देशभर में सतत हरित विकास का उदाहरण भी पेश करेगा।
