मालेगांव ब्लास्ट केस: ‘मोहन भागवत’ की ‘गिरफ्तारी’ का ‘दावा खारिज’, ‘कोर्ट’ ने दिया ‘बड़ा झटका’, क्या ‘साजिश’ थी?

‘NIA’ को ‘क्लीन चिट’ देने वाली ‘रिपोर्ट’ का ‘विरोध’ करने वालों को ‘झटका’, ‘आरोपी’ के ‘दावे’ पर ‘अदालत’ का ‘फैसला’

मुंबई, 02 अगस्त 2025: मालेगांव ब्लास्ट मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। कोर्ट ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की गिरफ्तारी के एक कथित दावे को खारिज कर दिया है। यह दावा एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को क्लीन चिट देने वाली रिपोर्ट का विरोध करने वालों द्वारा किया गया था, जिसमें मोहन भागवत को मामले में शामिल करने की मांग की गई थी। कोर्ट के इस फैसले से उन अटकलों पर विराम लग गया है, जो इस मामले में आरएसएस प्रमुख की संभावित संलिप्तता को लेकर चल रही थीं।

यह निर्णय इस बात की पुष्टि करता है कि मोहन भागवत के खिलाफ लगाए गए आरोप पुख्ता सबूतों पर आधारित नहीं थे। इस मामले से जुड़े आरोपी द्वारा यह दावा किया गया था कि मोहन भागवत को मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन कोर्ट ने इस दावे को पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया है। यह फैसला मालेगांव ब्लास्ट केस की जटिलताओं को और बढ़ा देता है, जहां कई सालों से कानूनी लड़ाई चल रही है। अब इस फैसले के बाद, मामले की दिशा और आगे की सुनवाई पर इसका क्या असर होगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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