यूकां मामला: एक्सपर्ट कमेटी सदस्यों के जवाब से हाईकोर्ट असंतुष्ट

जबलपुर। यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे विनिष्टीकरण मामले में गुरुवार को हाईकोर्ट के समक्ष सुनवाई हुई। जस्टिस अतुल श्रीधरन व जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष पूर्व निर्देश के पालन में गुरुवार को यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे को नष्ट के मामले में एक्सपर्ट कमेटी के सदस्य हाजिर हुये। जिनसे युगलपीठ ने सवाल-जवाब किए, लेकिन सदस्यों द्वारा दिये गये जवाब से न्यायालय संतुष्ट नहीं हुआ। जिस पर न्यायालय ने मामले की सुनवाई 14 अगस्त निर्धारित करते हुए कहा है कि उस दिन सभी एक्सपर्ट सदस्य कोर्ट के द्वारा पूछे गए सवालों के परिप्रेक्ष्य में अपेक्षाकृत अधिक संतोषजनक सहित हाजिर हों।

उल्लेखनीय है कि जनहित याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ व खालिद नूर फखरुद्दीन ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया विगत सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से रिपोर्ट पेश की गई थी। जिसमें अवगत कराया गया था कि यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का विनिस्टिकरण सफलतापूर्वक पीथमपुर स्थित सुविधा केंद्र में कर दिया गया है। केंद्रीय व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में जहरीले कचरे का विनिष्टिकरण किया गया है। जहरीले कचरे से 850 मीट्रिक टन राख व अवशेष एकत्रित हुआ है। एमपी-पीसीबी से सीटीओ मिलने के बाद अलग लैंडफिल सेल में उसे नष्ट किया जाएगा। कोर्ट ने उक्त रिपोर्ट को रिकार्ड पर ले लिया था। इसी के साथ कंपाइल स्टेसस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये थे। इस बीच हाईकोर्ट में एक अन्य जनहित याचिका के जरिए दावा किया गया है कि यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की राख में रेडियो एक्टिव पदार्थ सक्रिय हैं, जो चिंता का विषय है। हाईकोर्ट ने इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद मूल मामले के साथ सुनवाई किये जाने की व्यवस्था दी थी। जिस पर गुरुवार को सभी मामलों की संयुक्त रूप से सुनवाई हुई। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा नष्ट करने के दौरान हेवी मेटल व मर्करी को लेकर सवाल किया, साथ ही यह भी पूछा था कि जब मामला इतना जटिल था, तो यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा नष्ट करने के लिए ऐसी साइट क्यों चुनी गई?, जिसके आसपास काफी संख्या में नागरिक निवास करते हैं। इस बात की परवाह क्यों नहीं की गई कि यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा नष्ट करने की प्रक्रिया में लोगों के स्वास्थ्य व पर्यावरण को क्षति हो सकती है। उक्त सवालों के दिये गये जवाब पर असंतुष्टि जाहिर करते हुए न्यायालय ने कहा है कि आगामी सुनवाई में एक्सपर्ट कमेटी के सदस्यों के जवाबों पर गौर करने के साथ अन्य बिंदुओं पर भी विचार किया जाएगा।

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