
(आशीष कुर्ल की रिपोर्ट )भोपाल: शाहपुरा क्षेत्र का प्रसिद्ध मोर वन, जो अब तक अपने मोरों, बंदरों और सरीसृपों के लिए जाना जाता था और जहां हर सुबह सैकड़ों लोग सैर के लिए आते हैं, अब धीरे-धीरे कब्रगाह में तब्दील होता जा रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कुछ लोग शाम के समय, जब आम जनता कम होती है, यहां गुपचुप तरीके से दफन क्रियाएं कर रहे हैं। इस कारण वन की शांति और पर्यावरणीय संतुलन खतरे में पड़ गया है।
इस संबंध में जब इस संवाददाता ने मुख्य वन संरक्षक राकेश खरे से बात की, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है। वहीं, आकाश गंगा कॉलोनी के निवासी डॉ. अजीत सलूजा, जिन्होंने कभी सीपीए की बंजर भूमि पर हजारों पौधे लगाकर आज के मोर वन का स्वरूप दिया, ने कहा, यह बिल्कुल नहीं होना चाहिए। यह स्थान सार्वजनिक हित और पर्यावरण संरक्षण के लिए विकसित किया गया था, न कि इस प्रकार की गतिविधियों के लिए।
इसी क्षेत्र के निवासी अतुल बोहरे ने कहा, जब सरकार ने पहले से ही ऐसे अनुष्ठानों के लिए जगहें निर्धारित की हैं, तो लोगों को संरक्षित क्षेत्र में दफन क्रियाएं नहीं करनी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि यह सिलसिला नहीं रुका तो मोर वन का अस्तित्व और पर्यावरणीय महत्व गंभीर संकट में पड़ जाएगा।
