निष्पक्षता पर रार: यह SIR नहीं, सेलेक्टिव इंटेंसिव रिमूवल, लोकतंत्र की जड़ों पर हमला: सिंघार

भोपाल: विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे “सेलेक्टिव इंटेंसिव रिमूवल” बताते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की जड़ों पर खतरा है।प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंघार ने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और व्यावहारिकता पर कई सवाल खड़े किए। चुनाव आयोग ने SIR के दूसरे चरण की घोषणा की है, जो 4 नवंबर 2025 से 7 फरवरी 2026 तक 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलेगा। आयोग का दावा है कि 51 करोड़ मतदाताओं की घर-घर गणना मात्र 30 दिनों में पूरी कर ली जाएगी।

सिंघार ने सवाल उठाया कि इतनी विशाल प्रक्रिया इतने कम समय में कैसे पूरी हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस जल्दबाज़ी में लाखों वैध मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि केवल 12 राज्यों को ही क्यों चुना गया, और बाकी राज्यों को क्यों छोड़ा गया — चयन के मानदंड सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए।
उन्होंने असम को NRC के बहाने SIR से बाहर रखने को पक्षपातपूर्ण बताया और पूछा कि आयोग ने स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) की खामियों की समीक्षा किए बिना SIR क्यों लागू किया।

बिहार के उदाहरण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वहां 47 लाख से अधिक मतदाता नाम हटाए गए, और सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।
मध्यप्रदेश की स्थिति पर बोलते हुए सिंघार ने कहा कि राज्य की 22% आदिवासी आबादी के सामने दस्तावेज़ी व डिजिटल पहुंच की कमी के कारण नाम हटने का गंभीर खतरा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 3 लाख से अधिक वनाधिकार दावे खारिज किए जा चुके हैं, जिससे आदिवासी मतदाता वंचित हो सकते हैं। प्रवासी मजदूर, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग भी प्रभावित होंगे।

सिंघार ने याद दिलाया कि उन्होंने पहले ही मध्यप्रदेश में “वोट चोरी” के मामलों का खुलासा किया था, जिसमें सिर्फ दो महीनों में 16 लाख नए नाम मतदाता सूची में जोड़े गए थे। इस पर अब तक आयोग ने कोई जवाब नहीं दिया है।उन्होंने कहा कि वर्तमान स्वरूप में SIR मतदाता सूची की सफाई नहीं, बल्कि मताधिकारों के व्यवस्थित हनन और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को कमजोर करने की प्रक्रिया है।

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