महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित
हाल ही नियुक्त हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का महाकौशल के सबसे बड़े जिले जबलपुर का प्रथम दौरा हुआ। उनके स्वागत में शहर में जमकर पोस्टर-बाजी की गई। भाजपा के तमाम नेता अपने आप को नए प्रदेश अध्यक्ष की फोटो के साथ पोस्टर-बैनरों में खास जतलाते हुए नजर आए। खंडेलवाल का स्वागत ऐतिहासिक बताया गया, लेकिन इससे ज्यादा चर्चा शहर में लगाए गए प्रदेश अध्यक्ष के साथ भाजपा सांसद आशीष दुबे के बैनर किसी अज्ञात तत्व द्वारा फाड़ने को लेकर हुईं।
जिस पर कांग्रेस के पूर्व नगर अध्यक्ष दिनेश यादव का बयान सामने आया कि ये भाजपा की अंतर-कलह का नतीजा है कि खुद पार्टी के किसी नेता द्वारा सांसद आशीष दुबे का बैनर फाड़ा गया है। क्योंकि इन दिनों भाजपा के नेताओं में इस बात की होड़ लगी है कि वे सभी अपने आप को नये भाजपा प्रदेश नेतृत्व के सामने सबसे लोकप्रिय कैसे दिखाएं। यादव की माने तो उनका कहना है कि अगर प्रदेश अध्यक्ष, सांसद का बैनर पोस्टर कोई और फाड़ता तो सत्तारूढ़ दल सबसे पहले इसकी शिकायत करता और फिर पुलिस फोर्स लगाकर मामले में जमकर हंगामा किया जाता लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ, जिससे साफ है कि भाजपा की अंतर-कलह के कारण की पार्टी के ही किसी कार्यकर्ता ने ये पोस्टर फाड़ा होगा।
कांग्रेस का कटाक्ष
कांग्रेस के पूर्व नगर अध्यक्ष दिनेश यादव ने ये भी कहा कि अगर जनता में से किसी ने ये कृत्य किया है तो वह भी एक शुभ संकेत माना जाना चाहिए क्योंकि भाजपा के नेतृत्व में बढ़ती मंहगाई, बेरोजगारी के खिलाफ जनता अब एकजुट होती जा रही है और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के आगमन के पहले ही बैनर-पोस्टर फाड़कर अपना आक्रोश व्यक्त कर रही है। हालांकि यादव के इस कटाक्ष को भाजपाई दिया तले अंधेरा वाली कहावत बता रहे हैं।
छात्र राजनीति का अखाड़ा बना नर्सिंग कॉलेज
हमें राजनीति का हिस्सा नहीं बनना तो क्या कोई जबर्दस्ती है, ये चर्चाएं संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नर्सिंग कॉलेज के गलियारों में कुछ प्रोफेसर्स व नर्सिंग छात्राओं के खेमे में हुईं तो जिसने ये सुना वो दंग रह गया। हॉस्टल में छात्राएं रह रहीं वह मजबूरी में प्रिंसिपल के दवाब में एन एस यू आई की सदस्यता ग्रहण करने मजबूर हो गईं तो कुछ प्रोफेसर ने विरोध कर दिया.. बस फिर क्या था, मामला डीन तक पहुंचा लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई।
कहा जाता है कि राजनैतिक दल में सदस्यता ज्वाइन करने कोई जबर्दस्ती नहीं होती और जिस भी छात्र-छात्राओं की उस राजनैतिक दल में जुड़ने इच्छा रहती है वह उसमें आपसी सहमति से जुड़ जाता है, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह मेडिकल के नर्सिंग कॉलेज की महिला प्रोफेसर ने प्रिंसिपल के कमरे के जो राज खोले उसने सभी को चौंका दिया।
इसके बाद नर्सिंग कॉलेज में ये भी चर्चाएं थीं कि अब तो छात्राओं के साथ साथ प्रोफेसर्स को वो प्रिंसिपल स्टेला पीटर का कमरा, वह एन एस यू आई कार्यकर्ताओं के समूह का प्रतिनिधिमंडल उन्हें सपने में आने लगा है। इस घटनाक्रम ने मेडिकल के नर्सिंग कॉलेज प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया। मामला उछला तो प्रिंसिपल अपना बचाव करते नजर आई लेकिन मामले ने एक सिस्टम की धज्जियां उड़ा दीं कि राजनैतिक दल में सदस्यता लेने कोई संगठन प्रिंसिपल के साथ मिलकर कैसे जबर्दस्ती कर सदस्यता ग्रहण करवा रहा है।
नर्सिंग कॉलेज परिसर में चर्चाएं ये भी हैं कि जिसने विरोध किया अब उसकी खैर नहीं। क्योंकि प्रिंसिपल अब विरोध करने वालों को छोड़ेगी नहीं, बस यही खतरा अब जबर्दस्ती संगठन की सदस्यता ग्रहण नहीं लेने वालों के सिर पर मंडरा रहा है। उधर इस गुंडागर्दी की खबर एबीवीपी को लगी तो दोनों संगठन आमने-सामने खड़े हो गये। हालात हाथापाई तक के बन गए। फिलहाल यह मामला चिंगारी की तरह अंदर ही अंदर सुलग रहा है, लावा कब बाहर आएगा, यह देखना दिलचस्प रहेगा।
