
नयी दिल्ली, 24 जुलाई (वार्ता) देश में बिजली की मांग अगले 10 वर्षों में बढ़कर चार ट्रिलियन यूनिट पहुँच जायेगी जिसे पूरा करने के लिए इस क्षेत्र में 65 से 70 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत है।
ओमनीसाइंस कैपिटल द्वारा गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में साल 2035 तक 1,300 से 1,400 गीगावाट अतिरिक्त बिजली क्षमता स्थापित किये जाने की संभावना है। इसके लिए 65 से 70 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। इसमें पारेषण ग्रिडों और स्मार्ट मीटर लगाने पर करीब 15 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे।
ओमनीसाइंस कैपिटल के अध्यक्ष और मुख्य पोर्टफोलियो मैनेजर अश्विनी शामी ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा की तरफ तेजी से बढ़ते झुकाव को देखते हुए बुनियादी ढाँचे में 65 लाख करो़ड़ रुपये के निवेश का बड़ा अवसर है।
रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा समय में देश में बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता 475 गीगीवाट है जिसमें 220 गीगावाट यानी 46 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा है। साल 2035 तक कुल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़कर 1,364 गीगावाट होने की संभावना है जिसमें 971 (71 प्रतिशत) गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा होगी।
ओमनीसाइंस कैपिटल का अनुमान है कि देश के ऊर्जा मिश्रण में इस बदलाव के लिए 54 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी। इसमें सौर ऊर्जा पर 23 लाख करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है जिससे उसकी स्थापित क्षमता में 458 गीगावाट की वृद्धि होगी। इस प्रकार प्रति गीगावाट के लिए पाँच हजार करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।
सौर के बाद पवन ऊर्जा क्षमता पर सबसे ज्यादा 11.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किये जाने का अनुमान है।
नवीकरणीय ऊर्जा पर सरकार के जोर के बावजूद कोयला आधारित बिजली उत्पादन इकाइयों के निर्माण पर अगले 10 साल में 9.2 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस व्यय से 108 गीगावट क्षमता वाले संयंत्रों की स्थापना की जायेगी।
परमाणु ऊर्जा क्षमता में 30 गीगावाट और जलविद्युत क्षमता में 51 गीगावाट की बढ़ोतरी होगी। इसके लिए क्रमशः 5.3 लाख करो़ड़ रुपये और 4.3 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी।
