हैदराबाद (वार्ता) तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार पिछड़ा वर्ग के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण लागू करने में आने वाली किसी भी कानूनी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
श्री भट्टी ने यहां सचिवालय में संवाददाताओं से कहा कि पिछड़ा वर्ग को 42 फीसदी आरक्षण देने का निर्णय राज्य सरकार की ओर से कराये गए जाति जनगणना के निष्कर्षों पर आधारित है। उन्होंने कहा, “हम इस फैसले के लिए प्रतिबद्ध हैं, भले ही कानूनी पेचीदगियां सामने आएं। हम पीछे नहीं हटेंगे।”
भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा) पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इसने शुरू में जाति जनगणना की जरुरत को खारिज कर दिया था। तेलंगाना सरकार और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दबाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी यह घोषणा करनी पड़ी कि जाति जनगणना को राष्ट्रीय जनगणना में शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 42 फीसदी आरक्षण का प्रस्ताव तेलंगाना मंत्रिमंडल और विधानसभा ने पहले ही पारित कर दिया है।
तेलंगाना प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव पर निशाना साधते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा, “ऐसा लगता है कि पिछड़े वर्गों के बारे में उनकी राय कमजोर है। मुझे पता है कि उनके भेजे गए कानूनी नोटिसों से कैसे निपटना है।” उन्होंने भाजपा पर दोहरा मापदंड अपनाने और आरक्षण की मांग का ईमानदारी से समर्थन न करने का आरोप लगाया।
श्री भट्टी ने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) पर भी निशाना साधा और उस पर इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हमने जाति जनगणना पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से की। बीआरएस केवल जनता को भड़काने और भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।”
तेलंगाना सरकार के दृढ़ संकल्प पर ज़ोर देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए विधानसभा और संसद में लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने राज्य में इस कदम का समर्थन करने वाले सभी दलों से राष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसी ही एकता दिखाने का आग्रह किया।
