नाननिंग, 17 जुलाई (वार्ता) चीन और आसियान देशों के 180 से अधिक प्रतिनिधि दक्षिण चीन के गुआंग्शी झुआंग स्वायत्त क्षेत्र की राजधानी नाननिंग में एकत्रित हुए जिसका उद्देश्य महिलाओं के विकास को बढ़ावा देने में एआई की परिवर्तनकारी क्षमता का पता लगाना है।
इस कार्यक्रम का शीर्षक ‘’सशक्तिकरण, साझाकरण, नवाचार: कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं महिला विकास’’ था। आसियान के साथ महिला विकास पर 2025 विनियम एवं सहयोग मंच ने 2006 में चीन-आसियान महिला मंच के रूप में अपनी शुरुआत के बाद अपना 9वां संस्करण शुरू किया।
कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में बुधवार को कंबोडिया में महिला मामलों के मंत्रालय की राज्य सचिव सोक चान चोरवी ने कहा, ‘’यह आयोजन आसियान, चीन और वैश्विक समुदाय में महिलाओं को तकनीकी परिवर्तन के केंद्र में रखने की बढ़ती आवश्यकता को दर्शाता है।’’
गुआंग्शी के उप पार्टी प्रमुख वांग वेइपिंग ने मंच पर दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रवेश द्वार के रूप में क्षेत्र की रणनीतिक भूमिका पर प्रकाश डाला तथा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक एवं भौगोलिक संबंधों का लाभ बताया।
वांग ने कहा कि गुआंग्शी में एक सीमा पार एआई पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो रहा है जिसमें बीजिंग, शंघाई और ग्वांगझोउ जैसे शीर्ष स्तरीर शहरों से विश्व-अग्रणी अनुसंधान एवं विकास को एकीकृत किया जा रहा है तथा डिजिटल युग में महिलाओं के लिए ज्यादा अवसर उत्पन्न करने के लिए आसियान क्षेत्र के अनुप्रयोगों को भी इसमें शामिल किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह में महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए गए।
दो दिवसीय कार्यक्रम में महिलाओं के विकास में एआई की भूमिका पर केंद्रित गोलमेज चर्चाएं साथ ही महिलाओं की एआई-संचालित उद्यमशीलता उपलब्धियों का प्रदर्शन करने वाली एक प्रदर्शनी भी शामिल हैं।
कार्यक्रम में शामिल कई लोगों ने एआई के क्षेत्र में चीनी नेतृत्व की सराहना की तथा इसके नवाचारों को आसियान देशों के लिए एक आदर्श कहा तथा महिलाओं के विकास के लिए समावेशी डिजिटल वातावरण का निर्माण करने हेतु मजबूत चीन-आसियान सहयोग का आह्वान किया।
वियतनाम महिला संघ की प्रथम उपाध्यक्ष दो थी थू थाओ ने कहा, ‘’हम चीन के सीमावर्ती क्षेत्रों के महिला संघों के साथ-साथ वियतनाम, लाओस एवं कंबोडिया के समकक्षों के साथ मजबूत संबंध चाहते हैं जिससे ई-कॉमर्स, सीमा पार व्यापार, स्वास्थ्य सेवा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं डिजिटल युग में आपसी विकास को बढ़ावा दिया जा सके।’’
