नयी दिल्ली, 14 जुलाई (वार्ता) खाड़ी देशों, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में कुशल कामगारों की बढ़ती मांग को देखते हुए निजी कंपनियों को कौशल विकास में खर्च बढ़ाने की जरूरत है, ताकि इस अवसर का लाभ उठाया जा सके।
बाजार अध्ययन कंपनी क्रिसिल की सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2014-15 के अब तक देश की निजी कंपनियों ने कौशल विकास पर 2.22 लाख करोड़ रुपए खर्च किए हैं, जो उनके कुल सीएसआर खर्च का मात्र 3.5 प्रतिशत है। इसमें कहा गया है कि खाड़ी सहयोग परिषद, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के देशों में कुशल कामगारों की काफी कमी है – विशेष रूप से स्वास्थ्य, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और निर्माण क्षेत्र में कुशल लोगों की जरूरत है।
क्रिसिल की बिजनेस हेड (रिस्क सॉल्यूशन) बिनाइफर जहानी ने कहा कि सीएसआर निवेश को छिटपुट कौशल विकास गतिविधियों से कहीं आगे ले जाने की जरूरत है। सरकार की पहलों के साथ मिलकर सीएसआर में भारत के वैश्विक कार्यबल को तैयार करने की काफी क्षमता है। हमारे विश्लेषण में यह बात सामने आयी है कि इस क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए चरणबद्ध तरीके से कौशल की पहचान करने और उन्हें प्राथमिकता देने की जरूरत है।
क्रिसिल ने तीन तरह के कौशल विकास लक्ष्यों की पहचान की जरूरत बतायी है। अल्पावधि (एक से दो साल) में सीएसआर फंड को आसानी से सिखाये जा सकने वाले कौशलों पर फोकस करना चाहिए। इनमें देखभाल, निर्माण क्षेत्र से जुड़े कौशल, विदेशी भाषा का ज्ञान और सांस्कृतिक समझ शामिल हैं।
मध्यम अवधि (दो से पांच साल) के लिए निजी क्षेत्र को सहयोग मजबूत करने और उन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की सलाह दी गई है जिनकी वैश्विक स्तर पर काफी मांग है। इनमें आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी), साइबर सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आतिथ्य और पर्यटन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
दीर्घावधि के लिए रोबिटिक्स, ब्लॉकचेन, विशिष्ट विनिर्माण और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों पर फोकस करने की सलाह दी गयी है, जिनके लिए निजी-सरकारी सहयोग बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। इस तरह के कौशल विकसित करने के लिए पाठ्यक्रमों में बदलाव की भी जरूरत होगी।
क्रिसिल की एसोसिएट डायरेक्टर मोनिका पटनायक ने उदाहरण देते हुए बताया कि ऑटोमोटिव सेक्टर के अंतरराष्ट्रीय स्तर के तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की 65 प्रतिशत आबादी 35 साल से कम उम्र की है, जिससे वैश्विक कौशल मांग को पूरा करने के लिए हमारे पास सुनहरा अवसर है। निजी क्षेत्र सीएसआर के जरिए इस खाई को भरकर इस अवसर को भुनाने में मददगार हो सकता है।
