मंडला :मंडला शहर में नो एंट्री सिर्फ दिखावे के लिए रह गई है, क्योंकि भारी वाहनों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं। मुख्यालय की तंग गलियों में भी ट्रक-हाइवा ऐसे दौड़ रहे हैं जैसे यहीं उनकी रेस होनी है। पढ़ाओ वार्ड हो या अन्य आवासीय क्षेत्र, गोदाम मालिकों की चांदी है – भारी वाहन सीधे गली के मुंह में घुसकर गोदाम के मुंह पर पार्क हो रहे हैं।
जब भी यातायात विभाग से पूछो कि साहब, नो एंट्री का क्या हुआ? तो वही रटा-रटाया जवाब : “मामला संज्ञान में है, दिखवाता हूं।” लगता है संज्ञान में लेने से ही विभाग का पेट भर जाता है, काम करने की भूख तो कबकी मर गई है ।कलेक्टर महोदय ने साफ आदेश जारी किए थे कि सुबह 6 से रात 10 बजे तक भारी वाहन शहर में प्रवेश नहीं करेंगे। इसके बाद भी कभी दोपहर तो कभी शाम को, ये ‘नो एंट्री’ बस चाय की प्याली की तरह हिलाई जाती है – बस फुस्स।
सवाल यह है कि आखिर संज्ञान में लेने से आगे कोई कदम क्यों नहीं बढ़ता ? या फिर संज्ञान में लेकर विभाग ने अपनी ड्यूटी निभा दी और वाहनों ने अपनी ।
पड़ाव वार्ड में सुबह फिर वही खेल हुआ-भारी वाहन ने गली में घुसकर गोदाम की गोदी में सिर टिका लिया। पहले भी इन गलियों में दुर्घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन न प्रशासन चेता, न ट्रैफिक विभाग।
अब जनता भी पूछने लगी है – क्या ट्रैफिक विभाग ‘नो एंट्री’ को सिर्फ वॉलपेपर समझता है? या फिर अगली दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है ?
जवाब कोई नहीं… बस अगली बार जब पूछेंगे तो वही जवाब मिलेगा – “मामला संज्ञान में है।”
