
इंदौर:साइबर ठगी का एक पुराना तरीका आज भी शहर में लोगों को लगातार शिकार बना रहा है. ठग क्रेडिट कार्ड बंद होने या अपडेट करने के नाम पर रोजाना किसी न किसी को निशाना बना रहे हैं. वर्ष 2025 के पहले छह माह में इंदौर क्राइम ब्रांच के पास ऐसे 180 मामले सामने आए हैं, जिनमें लोगों से दस हजार से लेकर एक लाख रुपए तक की ठगी की गई है.
ठग खुद को बैंक अधिकारी बताकर कॉल या मैसेज करते हैं और लोगों को भरोसे में लेकर उनसे ओटीपी साझा करवा लेते हैं. जैसे ही ओटीपी दिया जाता है, तुरंत बैंक खाते से रकम उड़ जाती है. अधिकांश पीड़ितों को जब तक ठगी का अहसास होता है, तब तक उनके खाते से राशि निकल चुकी होती है. क्राइम ब्रांच सूत्रों ने बताया कि ठगों द्वारा उपयोग किए जा रहे बैंक खाते आमतौर पर किराए पर लिए गए होते हैं या किसी अन्य के नाम पर फर्जी दस्तावेजों से खोले जाते हैं.
ठग खाते में आई रकम को या तो एटीएम से निकाल लेते हैं या फिर अन्य खातों में ट्रांसफर कर ऑनलाइन खरीदारी कर डालते हैं. इस वजह से मुख्य आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर रहते हैं और कार्रवाई केवल खाताधारकों तक सीमित रह जाती है. हालांकि, समय रहते शिकायत करने पर पुलिस संबंधित बैंक खाते को ब्लॉक कर राशि बचा भी लेती है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अब भी सतर्कता के अभाव में ठगी का शिकार हो रहे हैं.
साइबर पाठशाल से लोगों को कर रहे जागरूक
पुलिस द्वारा ‘साइबर पाठशालाएं’ लगाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है, फिर भी यह तरीका लगातार कारगर बना हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान कॉल पर ओटीपी साझा न करें और क्रेडिट कार्ड संबंधित अपडेट के लिए केवल अधिकृत बैंक चैनलों का ही उपयोग करें.
