इंदौर:भ्रष्टाचार में शासन में कई भ्रष्ट लोग भी शामिल है यह जग ज़ाहिर है. मुख्यमंत्री के वाहन में मिलावटी डीजल डालने वाली घटना पर कड़ी करवाई कर पेट्रोल डीजल पंप सील किया गया था. संचालक पर एफआईआर की गई लेकिन प्रदेशभर के हज़ार पंपों पर आज तक नकेल नहीं कसी गई.रतलाम की घटना के बाद भी शासन-प्रशासन ने सख्त रूख नहीं अपनाया. जांच के आदेश भी ठंडे हो गए.
फलस्वरूप यह हुआ कि प्रदेशभर के पंप संचालाकों में डर नहीं रहा और वहां धड़ल्ले से ईंधन की चोरी करते रहे. हाल ही में इंदौर के टॉवर चौराहे पर स्थित पेट्रोल पंप एक व्यक्ति ने अपने दो पहिया वाहन में सौ रूपए का पेट्रोल डलवाया. मौके पर ही पेट्रोल निकाला गया तो वहां आधा लीटर ही मिला, जिसका वीडियो प्रदेश भर में वायरल हो गया. इस तरह की यहां पहली घटना नहीं है. पेट्रोल की चोरी पिछले कई वर्षो से होती आ रही है.
पंप मशीन कैसे सेट होती है और अधिकारी द्वारा जांच पर क्लीन चिट कैसे मिल जाती है? ऐसे में नीचे से लेकर ऊपर तक इसमें लिप्त सभी अधिकारी भ्रष्टाचार के कटघरे में दिखाई देते है. खाद्य आपूर्ति विभाग के कनिष्ठ अधिकारी या अपर अधिकारी को पंप के जांच के अधिकार प्राप्त थे लेकिन प्रदेश स्तर पर 31 जुलाई 2020 में उपरोक्त आदेश निरस्त करते हुए जांच के अधिकार जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रण गजेटेड अधिकारी को दिए गए.
प्रदेश में 6100 पेट्रोल पंप हैं. प्रदेश में 25 जिला खाद्य गजेटेड अधिकारी हैं. ऐसे में एक पर 244 पंप का भार है. इस तरह कैसे जांच की प्रक्रिया पूरी हो पाएगी. शासन उपभोक्ताओं को ठगने कैसे बचाएगा यहां समय ही बताएगा. इसको लेकर एक निजी उपभोक्ता संस्था ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर नीति बनाने और सख़्त कारईवाई करने का आग्रह किया है.
इनका कहना है…
जहां जांच के आदेश दिए गए वहीं भ्रष्टाचार दिखाई दे रहा है. ईधन की चोरी की ख़बरें भी प्रकाशित होती हैं. कई लोग लिखित में भी देते है लेकिन कार्रवाई क्यों नहीं होती यह बड़ा सवाल है.
– जुनैद आलम
एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार ख़त्म करने की बात करती है. वहीं दूसरी ओर कड़ी कार्रवाई करने में पीछे रहती है. प्रजा सिर्फ वोट डालने के लिए नहीं होती. सरकार इस पर ध्यान दे.
– शैलेष शर्मा
हमारी संस्था द्वारा 4 जुलाई को जिला कलेक्टर को ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि उपभोक्तओं को ध्यान में रखकर कड़े कदम उठाते हुए ईंधन पंप पर अनियमितताओं को दूर किया जाए.
– पप्पू नरवरिया, सदस्य जागरूक उपभोक्ता समिति
