जलाशय लबालब, नर्मदा उफनाई, नौ जुलाई तक अलर्ट

बरगी बांध के खुलेंगे गेट

जबलपुर:बारिश का दौर जारी हैं। शनिवार को भी रिमझिम फुहारों की झड़ी लगी रही। चौबीस घंटे में 110.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। शुक्रवार सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक आठ मिमी बारिश दर्ज हुई। सीजन में अब तक 348.6 मिमी बारिश हो चुकी है। लगातार हो रही बारिश से नर्मदा उफना गई हैं। पांच से नौ जुलाई तक भारी बारिश की मौसम विभाग ने चेतावनी जारी कर दी हैं।

इस दौरान 100 मिमी से ज्यादा प्रतिदिन बारिश के आसार हैं। कैचमेंट एरिया में लगातार हो रही बारिश की वजह से जलाशय के बढ़ते जल स्तर को नियंत्रित करने रविवार को दोपहर 12 बजे रानी अवंति बाई लोधी सागर परियोजना बरगी बांध से लगभग 1 लाख 76 हजार 575 क्यूसेक पानी (5 हजार क्यूमेक) पानी की निकासी की जायेगी। परियोजना प्रशासन ने अलर्ट जारी कर बांध के निचले क्षेत्र के रहवासियों से नर्मदा नदी के तट और घाटों से सुरक्षित दूरी बनाये रखने की अपील की है।
बरगी बांध छलकने को बेताब
रानी अवंति बाई लोधी सागर परियोजना प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार 05 जुलाई की सुबह 8 बजे बरगी बांध का जलस्तर 416.10 मीटर आंका गया था और इस समय प्रति घण्टे 10 सेंटीमीटर अर्थात 1 लाख 99 हजार 883 क्यूसेक वर्षा जल प्रवेश कर रहा था। हालांकि, शनिवार को शाम 6 बजे की स्थिति में बरगी बांध में वर्षा जल की आवक में कुछ कमी आई है। शनिवार की शाम 6 बजे बांध का जलस्तर 416. 65 मीटर रिकार्ड किया गया था और इस समय बांध में लगभग 1 लाख 14 हजार 067 क्यूसेक (3 हजार 230 क्यूमेक) वर्षा जल प्रवेश कर रहा था।
निचले क्षेत्र के रहवासी रहें अलर्ट, घाटों पर बढ़ा जल स्तर
रानी अवंति बाई लोधी सागर परियोजना बांया मेसनरी बांध संभाग के कार्यपालन यंत्री राजेश सिंह गौंड ने बताया कि बांध से पानी छोड़े जाने से नर्मदा नदी के जलस्तर में 4 से 5 फीट तक वृद्धि होगी। इसे देखते हुये कार्यपालन यंत्री ने निचले क्षेत्र के रहवासियों से सतर्क रहने, माँ नर्मदा के घाटों से सुरक्षित दूरी बनाये रखने तथा डूब क्षेत्र में प्रवेश न करने की अपील की है। कार्यपालन यंत्री के अनुसार पानी की आवक को देखते हुये बरगी बांध से जल निकासी की मात्रा कभी भी बढाई या घटाई भी जा सकती है।
ये सिस्टम सक्रिय
मौसम विभाग की माने तो वर्तमान में मानसून टूफ माध्य समुद्र तल पर श्रीगंगानगर, भिवानी, आगरा, बांदा, डेहरी, पुरुलिया, कोलकाता होते हुए पूर्व-दक्षिणपूर्व दिश्या में उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक विस्तृत है। एक चक्रवातीय परिसंचरण पूर्वी मध्यप्रदेश एवं निकटवर्ती क्षेत्रों में माध्य समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊंचाई पर सक्रिय है। इसके साथ ही अन्य मौसम प्रणालियां सक्रिय है।

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