उत्पादों पर गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के संबंध में इस्पात मंत्रालय का स्पष्टीकरण

नयी दिल्ली, 02 जुलाई (वार्ता) इस्पात मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि इस्पात उत्पादों के संबंध में पिछला गुणवत्ता नियंत्रण आदेश अगस्त 2024 में जारी किया गया था और उसके बाद कोई नया गुणवत्ता नियंत्रण आदेश जारी नहीं किया गया है।

मंत्रालय ने कहा है कि मध्यवर्ती उत्पाद और उत्पादकों के लिए 13 जून का आदेश घरेलू उत्पदकों के साथ समान व्यवहार , डंपिंग की रोक तथा देश में इस्पात उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लक्ष्यों के अनुरूप है।

मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा कि पहले 151 बीआईएस (भारतीय मानक ब्यूरो) के मानकों के प्रवर्तन के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश जारी किए गए हैं उसके बाद कोई नया गुणवत्ता नियंत्रण ओदश जारी नहीं किया गया है।

विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘ इस्पात मंत्रालय के गत 13 जून के आदेश से यह स्पष्ट होता है कि बीआईएस मानकों के तहत अंतिम उत्पादों के निर्माण के लिए मध्यवर्ती सामग्री, इस्पात उत्पादों को भी ऐसे मध्यवर्ती उत्पादों के लिए निर्धारित बीआईएस मानकों का पालन करना होगा। कोई नया गुणवत्ता नियंत्रण आदेश जारी नहीं किया गया है।’

मंत्रालय ने 13 जून के आदेश से देश में इस्पात की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका को खारिज किया है।

आयोग का कहना है कि यह आदेश घरेलू उत्पादकों के साथ समानता के व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। इसे साथ-साथ तैयार उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मध्यवर्ती उत्पाद के लिए भी बीआईएस मानकों का अनुपालन अनिवार्य है।

मंत्रालय ने कहा है कि तैयार इस्पात उत्पादों का आयात तैयार इस्पात उत्पादों के भारतीय निर्माताओं के बराबर नहीं था, क्योंकि भारतीय इस्पात उत्पाद निर्माताओं को केवल बीआईएस मानक के अनुरूप मध्यवर्ती सामग्री का उपयोग करना पड़ता था, जबकि आयातकों द्वारा इस्पात उत्पादों के आयात के लिए ऐसी कोई आवश्यकता महसूस नहीं की जाती थी।

मंत्रालय का कहना है कि मध्यवर्ती उत्पाद के लिए बीआईएस मानकों का अनुपालन यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि तैयार उत्पाद बीआईएस मानकों द्वारा दी गई गुणवत्ता आवश्यकता के अनुसार हो। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो अंतिम उत्पाद घटिया हो सकता है।

मंत्रालय का कहना है कि यह भी ध्यान देने योग्य है कि कुछ देशों में अतिरिक्त क्षमता और घटती खपत के कारण घटिया स्टील की डंपिंग की बड़ी संभावना है। चूंकि भारत दुनिया में एकमात्र तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, इसलिए जब तक गुणवत्ता वाले स्टील के आयात के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए जाते हैं, तब तक भारतीय बाजार में सस्ते स्टील के आने की बहुत अधिक संभावना है।

मंत्रालय ने कहा है कि 13 जून के आदेश के कारण कीमतों में वृद्धि की आशंका निराधार है। भारत में इस्पात निर्माण की क्षमता 20 करोड़ टन है जो घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। इसलिए कीमतों में वृद्धि की कोई संभावना नहीं दिखती।

मंत्रालय ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया है कि भारत एकमात्र प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जहां पिछले तीन वर्षों से इस्पात की खपत 12 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ रही है। इसके विपरीत, अन्य भौगोलिक क्षेत्रों में इस्पात की खपत या तो स्थिर है या घट रही है। इस्पात की खपत में यह तेज वृद्धि भारत सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, भवनों और रियल एस्टेट में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के विकास और देश में पूंजीगत वस्तुओं के बढ़ते विनिर्माण पर जोर देने के कारण है। इस इस्पात की मांग को पूरा करने के लिए देश को 2030 तक लगभग 30 करोड़ टन इस्पात क्षमता और 2035 तक 400 मीट्रिक टन इस्पात क्षमता की आवश्यकता होगी। इस क्षमता निर्माण के लिए 2035 तक लगभग 200 अरब अमेरिकी डॉलर की पूंजी लगाने की आवश्यकता होगी।

मंत्रालय का कहना है कि यदि घटिया सस्ते इस्पात के आयात से घरेलू इस्पात उद्योग (एकीकृत इस्पात उत्पादक और लघु इस्पात उद्योग दोनों) प्रभावित होते हैं, तो इस पूंजी को लगाने की उनकी क्षमता पर भारी दबाव पड़ेगा।

 

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