बेंगलुरु (वार्ता) कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने यह कह कर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है कि अगर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) राज्य में सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ता पाया जाता है तो उस पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक ने सोशल मीडिया के जरिए चेतावनी जारी की और कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को खतरा पहुंचाने वाले या वैमनस्य फैलाने वाले किसी भी संगठन के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करेगी।
श्री प्रियांक ने एक्स पर लिखा,“भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता बार-बार हमें आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की चुनौती दे रहे हैं। यह इतने लंबे समय तक अंधे के शासन में खेलने जैसा नहीं है। अब बस एक बार समाज में शांति भंग करने, मृतकों पर राजनीति करने या कोई असंवैधानिक गतिविधि करने की कोशिश करें तो हम बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान की ताकत दिखाएंगे।”
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि भाजपा कांग्रेस को आरएसएस के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए उकसा रही है। उन्होंने दावा किया,“भाजपा हमें आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने के लिए उकसा रही है।”
यह पहली बार नहीं है जब श्री प्रियांक ने इस तरह की टिप्पणी की है। गत 25 मई को उन्होंने कहा था कि कोई भी संगठन, धार्मिक, राजनीतिक या सामाजिक जो कर्नाटक में ‘असंतोष और वैमनस्य’ फैलाता है, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा,“हम उनसे कानूनी और संवैधानिक तरीके से निपटेंगे – चाहे वह बजरंग दल हो, पीएफआई हो या कोई और संगठन। अगर वे कानून और व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करते हैं तो हम उन्हें प्रतिबंधित करने में संकोच नहीं करेंगे।”
श्री प्रियांक ने यह भी संकेत दिया है कि कांग्रेस सरकार हिजाब प्रतिबंध को वापस लेने पर विचार करेगी और ऐसे किसी भी कानून की समीक्षा करेगी जिसे उन्होंने ‘असंवैधानिक या लोगों के हितों के खिलाफ’ बताया है।
इस बीच कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने श्री प्रियांक की टिप्पणियों से सरकार को अलग करते हुए स्पष्ट किया कि आरएसएस पर प्रतिबंध के बारे में कोई आधिकारिक चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा,“ये व्यक्तिगत विचार या मीडिया के सवालों के जवाब थे। आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने का कोई सरकारी स्तर का निर्णय नहीं है।”
हाल ही में कर्नाटक विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस पार्टी के घोषणापत्र में सांप्रदायिक घृणा फैलाने वाले व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का वादा किया गया था खासकर जाति और धर्म के आधार पर।
श्री प्रियांक की टिप्पणियों ने कर्नाटक में वैचारिक संगठनों की भूमिका और वैधता के बारे में राजनीतिक बहस को फिर से हवा दे दी है, जहां कांग्रेस हाल ही में सत्ता में लौटी है।
