इंदौर: अदालत और सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद शहर के निजी अस्पतालों द्वारा बकाया राशि के नाम पर शवों को रोकने की घटनाएं थम नहीं रही हैं. एबी रोड स्थित सी-3 अस्पताल ने एक दलित मजदूर के शव को बकाया रकम के चलते दो दिनों तक रोके रखा. मामला तब तूल पकड़ गया जब बलाई महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दलित नेता अपने साथियों के साथ अस्पताल पहुंचे और घेराव कर शव को तत्काल परिजनों को सौंपने की मांग की.
संजय गांधी नगर में रहने वाले जगदीश भालेराव नामक दलित मजदूर को हार्ट की बीमारी के चलते बीते पांच दिनों से अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने शव देने के एवज में परिजनों से एक लाख रुपए की मांग की. परिजनों के पास राशि नहीं होने पर शव दो दिन तक अस्पताल में ही रोके रखा. जब इस बात की सूचना दलित नेता मनोज परमार को मिली तो वे अपने साथियों के साथ सी-3 अस्पताल पहुंच गए और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को कोर्ट के आदेश और सरकारी गाइडलाइन का हवाला देते हुए विरोध शुरू कर दिया. इस दौरान धरना, नारेबाजी और हंगामा भी हुआ.
सूचना मिलने पर विजय नगर पुलिस भी मौके पर पहुंची. मामले में मनोज परमार का कहना है कि अस्पताल की यह कार्रवाई न केवल अमानवीय है, बल्कि कानून का भी उल्लंघन है. उन्होंने मौके पर पुलिस अधिकारियों से अस्पताल प्रबंधन पर शव को बंधक बनाने और वसूली की धाराओं में प्रकरण दर्ज करने की मांग की. हंगामे के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मृतक का शव परिजनों को सौंप दिया. इस दौरान परिजनों द्वारा जमा की गई 20 हजार रुपए की रकम भी परमार ने परिजनों को वापस दिलवाई. मामले दलित नेता मनोज परमार का कहना है कि कफन की कीमत भी अब बोली में तय होने लगी, अस्पताल की दीवारों पे इंसानियत रोने लगी.
