नयी दिल्ली, 29 जून (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘वोकल फाॅर लोकल’ का मंत्र दोहराते हुए कहा है कि इससे भारत को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
श्री मोदी ने रविवार को आकाशवाणी पर अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 123वीं कड़ी में राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा,“ भारत जिस तरह अपनी क्षेत्रीय, भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है उसी तरह, कला, शिल्प और कौशल की विविधता भी हमारे देश की एक बड़ी खूबी है। प्रत्येक क्षेत्र में कोई एक विशेष वस्तु स्थानीय स्तर पर बहुत महत्व रखती है।” उन्होंने कहा कि मेघालय का एरी सिल्क ऐसी ही एक वस्तु है। इसका स्थानीय स्तर पर आदिवासी समाज उत्पादन करता है। इसे कुछ दिन पहले ही भू संकेतक मिला है। यह सिल्क मेघालय के लिए एक धरोहर की तरह है। स्थानीय जनजातियों ने, खासकर ख़ासी समाज के लोगों ने पीढ़ियों से इसे सहेजा भी है और अपने कौशल से समृद्ध भी किया है। इस सिल्क की कई ऐसी खूबियाँ हैं जो इसे बाकी कपड़े से अलग बनाती हैं।
उन्होंने कहा,“ इस सिल्क को जो रेशम के कीड़े बनाते हैं, उसे हासिल करने के लिए कीड़ों को मारा नहीं जाता है, इसलिए इसे, अहिंसा सिल्क भी कहते हैं। आजकल दुनिया में ऐसे उत्पाद की मांग तेजी से बढ़ रही है जिनमें हिंसा न हो, और प्रकृति पर उनका कोई दुष्प्रभाव न पड़े, इसलिए, मेघालय का एरी सिल्क वैश्विक बाजार के लिए एक उचित उत्पाद है।”
श्री मोदी ने कहा कि ये सिल्क सर्दी में गरम करता है और गर्मियों में ठंडक देता है। इसकी ये खूबी इसे ज़्यादातर जगहों के लिए अनुकूल बना देती है। मेघालय की महिलाएं अब स्वयं सहायता समूह के जरिए अपनी इस धरोहर को और बड़े पैमाने पर आगे बढ़ा रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा,“ मैं मेघालय के लोगों को एरी सिल्क को भू संकेतक मिलने पर बधाई देता हूँ। मैं आप सबसे भी अपील करूंगा कि आप भी एरी सिल्क से बने कपड़ों को जरूर देखें।”
उन्होंने कहा कि खादी, हथकरघा, हस्तशिल्प और वोकल फॉर लोकल को भी अपनाया जाना चाहिए।
श्री मोदी ने कहा,“ ग्राहक भारत में बने उत्पाद ही खरीदें और व्यापारी भारत में बने उत्पाद ही बेचें तो ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को नयी ऊर्जा मिलेगी।”
