पटना, 28 जून (वार्ता) बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज पुरानी गंगा धार को पुनर्जीवित करने एवं सीढ़ी घाट के निकट गंगा चैनल के दायें तट पर पक्का सुरक्षात्मक कार्य का लोकार्पण किया।
श्री कुमार ने शनिवार को यहां बख्तियारपुर प्रखंड में पुरानी गंगा धार को पुनर्जीवित करने एवं सीढ़ी घाट के निकट गंगा चैनल के दायें तट पर पक्का सुरक्षात्मक कार्य का लोकार्पण किया। इस अवसर पर आयोजित गंगा आरती में उन्होंने भाग लिया और पूजा अर्चना की। सीढ़ी घाट का विकास एवं गंगा नदी की पुरानी धारा को पुनर्जीवित किये जाने से स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया।
मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा कि यहां काफी अच्छा काम हुआ है। सीढ़ी घाट का विकास हो जाने से और गंगा नदी की पुरानी धारा पुनर्जीवित होने से श्रद्वालुओं को काफी सुविधा होगी। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों से गंगा की धारा सीढ़ी घाट से दूर चली गयी थी, जिसे हमलोगों ने वापस लाया है। सीढ़ी घाट एवं इसके आसपास चल रहे विकास कार्यों के पूर्ण हो जाने से यहां आने वाले लोगों को काफी सहूलियत होगी।”
श्री कुमार ने लोकार्पण के बाद बख्तियारपुर स्थित सीढ़ी घाट के निकट गंगा चैनल के दायें तट पर पक्का सुरक्षात्मक एवं सौंदर्यीकरण कार्य का निरीक्षण भी किया। प्राचीन सीढ़ी घाट मंदिर पर आने जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा एवं पर्यटकीय दृष्टिकोण से पर्याप्त जगह की उपलब्धता के लिए 63 करोड़ 54 लाख रूपये की लागत से सीढ़ी घाट गंगा चैनल के निकट दायें तट पर पक्का सुरक्षात्मक कार्य तथा सौंदर्यीकरण कार्य कराया गया है।
इस योजना के तहत सीढ़ी घाट में 330 मीटर की लंबाई में सीढ़ी निर्माण का कार्य 2100 मीटर में कटाव निरोधक कार्य तथा पर्यटकों के लिये पाथ-वे का निर्माण कराया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिये शौचालय, चेंजिंग रूम, लैंड स्केपिंग एवं प्रकाश की व्यवस्था का सौंदर्यीकरण कार्य भी इस योजना के तहत कराया गया है। इन सुविधाओं के बन जाने से सीढ़ी घाट पर पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ेगी।
उल्लेखनीय है कि बख्तियारपुर में लोक आस्था से संबद्ध प्राचीन सीढ़ी घाट मंदिर अवस्थित है। पूर्व के वर्षों में गंगा नदी बख्तियारपुर से सटे इस मंदिर के पास से गुजरती थी, जिसमें आसपास के श्रद्धालुगण धार्मिक अनुष्ठान किया करते थे। कालांतर में नदी धीरे-धीरे उत्तर दिशा की ओर विस्थापित होने लगी और बीते वर्षों में बख्तियारपुर शहर से काफी दूरी पर बह रही थी, जिसके कारण श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुष्ठान में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बख्तियारपुर प्रखंड के घनसुरपुर से देदौर तक गंगा नदी की पुरानी धारा को पुनर्जीवित किया गया है।
इस योजना के तहत घनसुरपुर से देदौर तक कुल 4,420 मीटर की लंबाई में गाद सफाई कर गंगा नदी की पुरानी एवं मृतप्राय धार को पुनर्जीवित किया गया है। 34 करोड़ 27 लाख रूपये की लागत से इस कार्य को पूर्ण किया गया है। इसके तहत वास क्षेत्र जैसे कि घनसुरपुर, करौटा एवं हटिया ग्राम के निकट चैनल में संभावित क्षरण को रोकने के लिए कुल 1520 मीटर की लंबाई में जीयो बैग स्लोप पिचिंग के द्वारा सुरक्षात्मक कार्य कराया गया है। चैनल में जलप्रवाह बनाये रखने के लिए अगले तीन वर्षों तक चैनल का रखरखाव एवं चैनल के दायें तट पर सुरक्षात्मक कार्य भी इसके तहत किया गया है।
मुख्यमंत्री ने बख्तियारपुर के सीढ़ी घाट स्थित श्री राधे कृष्ण मंदिर में पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। उन्होंने प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी सह पूर्व सांसद पंडित शीलभद्र याजी एवं उनकी धर्मपत्नी स्व. बालकेशवरी याजी की समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी।
इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, पटना प्रमंडल के आयुक्त डाॅ. चंद्रशेखर सिंह, जिलाधिकारी डाॅ. त्यागराजन एस.एम., वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा, श्री सत्यानंद याजी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं जल संसाधन विभाग के वरीय अधिकारी उपस्थित थे।
