
सरगना रांची से गिरफ्तार, जबलपुर में कोर्ट मेें पेश कर पांच दिन की रिमांड पर ईओडब्ल्यू ले गई भोपाल
जबलपुर, भोपाल, इंदौर में हुई जीएसटी धोखाधड़ी का खुलासा
जबलपुर। ईओडब्ल्यू ने जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेेडिट का फर्जीवाड़ा कर शासन को चूना लगाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया गया है। कागजों में चल रही फर्मों के जरिए लगभग 33 करोड़ का फर्जीवाड़ा उजागर हो गया है। ईओडब्ल्यू सरगना विनोद कुमार सहाय को रांची से गिरफ्तार कर जबलपुर लेकर आई, न्यायालय में पेश कर पांच दिन की रिमांड लेकर टीम उसे लेकर भोपाल रवाना हो गई है, जहां उससे सघन पूछताछ होगी।
यह मामला जबलपुर, भोपाल एवं इंदौर में एक सुनियोजित और बड़े पैमाने पर की गई जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़ा है। जिसमें एन. के. खरे उर्फ विनोद कुमार सहाय इस संगठित गिरोह का सरगना है। इस गिरोह ने भोले-भाले लोगों को झांसा देकर उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग किया और फर्जी फर्मे बनाकर करोड़ों रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट का अवैध हस्तांतरण कर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया। मामले का खुलासा प्रताप सिंह लोधी की शिकायत और वाणिज्य कर विभाग, जबलपुर की सहायक आयुक्तों श्रीमती वैष्णवी पटेल और श्रीमती ज्योत्सना ठाकुर द्वारा भेजी गई रिपोर्टों से हुआ।
ऋण का झांसा देकर फर्जीवाड़ा
मुख्य आरोपी विनोद कुमार सहाय जो खुद को पहले एन. के. खरे बताता था, जिसने वर्ष 2019-2020 के दौरान जबलपुर में प्रताप सिंह लोधी, दीनदयाल लोधी, रविकांत सिंह और नीलेश कुमार पटेल जैसे व्यक्तियों से संपर्क किया। उसने इन लोगों को यह कहकर झांसा दिया कि ऋण प्राप्त करने के लिए जीएसटी पंजीकरण आवश्यक है। इसके बहाने महत्वपूर्ण दस्तावेज हासिल कर लिए।
फर्जी फर्में बनाई, करोड़ों की फर्जी आउटवर्ड सप्लाई दर्शाई –
विनोद सहाय ने मेसर्स मां नर्मदा ट्रेडर्स प्रताप सिंह लोधी, मेसर्स नमामि ट्रेडर्स दीनदयाल लोधी, मेसर्स मां रेवा ट्रेडर्स रविकांत सिंह , मेसर्स अभिजीत ट्रेडर्स नीलेश कुमार पटेल के नाम फर्मेंं बनाई। जांच में पाया गया कि पंजीकृत फर्मों के पतों पर कोई वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं हो रही थी। ये फमें केवल कागजों पर मौजूद थीं। विनोद सहाय ने इन फर्जी फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपये की फर्जी आउटवर्ड सप्लाई (बिक्री) दर्शाई। इन फर्जी बिलों के आधार पर उसने बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ अन्य व्यवसायियों को दिलाया। वास्तविक माल या सेवा के आदान-प्रदान के बिना ही उत्पन्न किया गया था।
बोगस फर्मों से धोखाधड़ी
मेसर्स मां नर्मदा ट्रेडर्स प्रताप सिंह लोधी के नाम पर पंजीकृत इस फर्म ने 1,16, 62, 900 रुपये की आउटवर्ड सप्लाई दिखाकर 33, 33, 050 रुपये का बोगस आईटीसी अंतरित किया। इसका बैंक खाता विनोद कुमार सहाय द्वारा ही संचालित होता था। मेसर्स नमामि ट्रेडर्स फर्म ने 10, 58, 73, 393 रुपये की आउटवर्ड सप्लाई दिखाकर 2, 84, 67,101 रुपये का बोगस आईटीसी अंतरित किया। मेसर्स मां रेवा ट्रेडर्स फर्म नॉन- ऑपरेशनल पाई गई, लेकिन इसने 2,19, 27,147 रुपये की बोगस सप्लाई दिखाई। मेसर्स अभिजीत ट्रेडर्स नीलेश कुमार पटेल के नाम पर पंजीकृत इस फर्म का भी कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं पाया गया। इसने 9, 99, 86, 800 रुपये की बोगस सप्लाई की।
मप्र, छग, महाराष्ट्र तक फैला नेटवर्क-
यह धोखाधड़ी केवल इन चार फमों तक सीमित नहीं थी, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा थी जिसमें कई अन्य फर्मे शामिल थीं। जांच में पाया गया कि ये फमें मुख्य रूप से कोल ट्रेडिंग और बिल्डिंग मटेरियल ट्रेडिंग में शामिल थीं और मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और नागपुर (महाराष्ट्र) तक फैली हुई थीं। अब तक किए गए सत्यापन में, उक्त चार मुख्य फर्मों और उनके साथ व्यवसाय करने वाली 9 फर्मों द्वारा बोगस व्यवसाय कर कुल 33, 80, 43, 252 रुपये का फेक इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया जाना पाया गया है। जिस पर ईओडब्लयू ने एफआईआर दर्ज की। जिसके बाद सरगना को दबोचा गया।
इन फर्मों के नाम भी आये सामने
दिलीप ट्रेडर्स, अंकिता स्टील एंड कोल, जगदम्बा कोल कैरियर्स, कोराज टेक्निक्स, महामाया ट्रेडर्स, अंबर कोल डिपो, अनम ट्रेडर्स, विनोद सहाय स्वयं सिटरोन मिनरल्स प्रा.लि., गेरिसन कॉल प्रा.लि., आर्या कोल ट्रेडिंग प्रा.लि., वी. के. मिनरल्स प्रा.लि. और जे.एम.एस.डी. आलॉप्स प्रा. लि. जैसी कंपनियों में निर्देशक है, और इन कंपनियों द्वारा भी फेक इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया जा रहा है।
2 जुलाई तक रिमांड पर
मास्टरमाइंड विनोद सहाय के कब्जे से जीएसटी कर अपवंचन के लिए बनायी गई फर्जी फर्मों के दस्तावेज, अपराध में प्रयुक्त मोबाइल, फर्जी सील एवं अन्य कूटरचित दस्तावेज प्राप्त हुए है, आरोपी को 2 जुलाई तक पुलिस रिमांड में लिया गया है। विवेचना में जैसे-जैसे अन्य दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य एकत्र होंगे, यह राशि और भी बढऩे की संभावना है।
