‘सुगम्य भारत ऐप’ को अधिक सुगम बनाने के लिए किये गये बदलाव

‘सुगम्य भारत ऐप’ को अधिक सुगम बनाने के लिए किये गये बदलाव

नई दिल्ली, 27 जून (वार्ता) दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को अधिक सुगम बनाने के लिए 2021 में शुरू की गयी सुगम्य भारत ऐप को सरल और अनुकूल बनाने तथा इसकी उपयोगिता बढाने के उद्देश्य से इसमें कुछ बदलाव किये गये हैं।

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने शुक्रवार को यहां बताया कि इस ऐप पर अब तक तक 2705 शिकायतें मिली हैं जिनमें से 1897 शिकायतों का समाधान किया जा चुका है। इस प्लेटफॉर्म पर 14 हजार 358 पंजीकृत उपयोगकर्ता और 83 हजार 791 डाउनलोड हैं।

देश में दिव्यांगजनों तथा वरिष्ठ नागरिकों की संख्या तथा उनकी चुनौतियों को देखते हुए शिकायतों की संख्या अपेक्षाकृत कम हैं और इसे ध्यान में रखते हुए इसकी उपयोगिता बढ़ाने के लिए दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने हाल ही में ऐप में बदलाव किया है।

ऐप में शुरू की गयी नई सुविधाओं में उपयोगकर्ताओं के -अनुकूल इंटरफ़ेस, एआई-संचालित चैटबॉट सहायता, सरकारी योजनाओं पर अपडेट और सुगम्यता से संबंधित पहलों की जानकारी तक पहुंच को आसान बनाया गया है। यह ऐप गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर दोनों पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध है।

इस बीच दिव्यांगजनों के अधिकारों से संबंधित राष्ट्रीय फाेरम के महासचिव मुरलीधरन ने कहा है कि हाल ही में इंटरनेट और ऐप-आधारित समाधानों तथा प्रणालियों पर निर्भरता बहुत अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा यह सही है कि इंटरनेट की पहुंच बढ़ी है लेकिन इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि अधिकांश विकलांग व्यक्ति आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं जिनके पास स्मार्ट फोन छोड़िए बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। इसलिए इसमें आश्चर्य की बात नहीं है कि सभी बड़े-बड़े दावों के बावजूद व्यवस्था पर लोगों का भरोसा अधिक नहीं है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा शिकायत समाधान का यह मतलब नहीं है कि समस्या समाप्त हो गयी है। इसे आधिकारिक स्तर पर ‘समाधान’ माना जा सकता है भले ही शिकायतकर्ता को कोई राहन न मिली हो। उन्होंने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए ऐप और दूसरे तरीकों का मिश्रण होना चाहिए। यदि केवल ऐप पर ही जोर दिया जाता है तो इससे फायदे के बजाय नुकसान हो सकता है।

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में दिव्यांगजनों की संख्या ढाई करोड़ से अधिक थी जो कुल आबादी का 2.21 प्रतिशत है। वर्ष 2018 में राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के 76वें दौर के डेटा से पता चलता है कि समय के साथ दिव्यांगजनों का अनुपात थोड़ा बढ़ा है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार कुल मिलाकर देश की 2.3 प्रतिशत आबादी किसी न किसी तरह की विकलांगता से पीड़ित बताई गई है।

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