
जबलपुर। महिला ने पति पर मासूम बच्ची जबरन ले जाने का आरोप लगाते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की, जिसकी सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दम्पति को आपसी सुलह के लिए एक सप्ताह का समय प्रदान किया था। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ को बताया गया कि दोनों के बीच बातचीत हुई है परंतु सुलह नहीं हो पाई है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद दोनों के बीच सुलह के लिए प्रकरण को दिल्ली हाईकोर्ट के मध्यस्थता केन्द्र स्थानांतरित करने के आदेश जारी किये है। युगलपीठ ने दम्पति को निर्देशित किया है कि 2 जुलाई को वह दिल्ली हाईकोर्ट स्थित मध्यस्थता केन्द्र में एक्सपर्ट के समक्ष उपस्थित होगे। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 31 जुलाई को निर्धारित की है।
याचिकाकर्ता रीवा रोड सतना निवासी मेघा गांधी की तरफ से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में कहा गया था कि पति राहुल से पारिवारिक विवाद होने के कारण वह अपनी साढ़े तीन वर्षीय बच्ची के साथ अलग रहती थी। वह अपनी बच्ची के साथ 20 मार्च को बाजार गयी हुई थी। कार में बच्ची बैठी हुई थी और वह कुछ सामान लेने दुकान चली गयी थी। इस दौरान पति राहुल बच्ची को लेकर चला गया।
बच्ची के लापता होने पर उसकी तलाश प्रारंभ की। तभी पति राहुल ने फोन कर बताया कि बच्ची उसके साथ है। जिसके बाद उसने कोतवाली थाना पहुंचकर पति द्वारा बच्ची को जबरन ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट दर्ज करने के बावजूद भी पुलिस द्वारा बच्ची को तलाशने के संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की गयी। जिसके कारण उक्त बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गयी है। याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य शासन, गृह सचिव, एसपी सतना, थाना प्रभारी सतना कोतवाली सहित पति को हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किये थे। युगलपीठ ने अनावेदक पति को आदेशित किया था कि वह अगली सुनवाई के दौरान बच्ची के साथ न्यायालय में उपस्थित हुए।
पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान दम्पति हाईकोर्ट में उपस्थित हुए थे। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि ऐसा कोई गंभीर मुद्दा नहीं है कि जिसका निराकरण नहीं हो सकता है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद दोनों को सुलह के लिए एक सप्ताह का समय प्रदान किया था। इस दौरान बच्ची पिता की कस्टडी में रहेंगी और मॉ उससे मिल सकते है। याचिका पर सुनवाई के बाद युगलपीठ ने सोमवार को उक्त आदेश जारी किये। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य अधिकारी ने पैरवी की।
