टोक्यो और पेरिस ओलंपिक में भारतीय टीम का हिस्सा रहे अनुभवी फॉरवर्ड ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहा; चोटों और फॉर्म में गिरावट को बताया कारण।
नई दिल्ली, 23 जून (नवभारत): भारतीय पुरुष हॉकी टीम को एक बड़ा झटका लगा है, क्योंकि दो बार के ओलंपिक मेडलिस्ट और अनुभवी फॉरवर्ड ललित उपाध्याय ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। यह खबर भारतीय हॉकी प्रेमियों और टीम प्रबंधन के लिए निराशाजनक है, क्योंकि ललित पिछले कई वर्षों से टीम की फॉरवर्ड लाइन का एक अभिन्न अंग रहे हैं। उनका संन्यास ऐसे समय में आया है जब टीम अगले ओलंपिक चक्र की तैयारी कर रही है।
ललित उपाध्याय ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वह भारतीय टीम के उस ऐतिहासिक दल का हिस्सा थे जिसने टोक्यो ओलंपिक 2020 में कांस्य पदक जीता था, जो 41 साल बाद ओलंपिक पोडियम पर भारत की वापसी थी। इसके अलावा, उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए पेरिस ओलंपिक 2024 में भी टीम में अपनी जगह बनाई थी, जिससे यह उनके लिए दूसरा ओलंपिक अनुभव था। ललित ने अपने संन्यास के पीछे चोटों और हाल के समय में फॉर्म में आई गिरावट को मुख्य कारण बताया है। उन्होंने कहा कि शीर्ष स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए जिस फिटनेस और तीव्रता की आवश्यकता होती है, उसे बनाए रख पाना उनके लिए मुश्किल हो रहा था।
चोटों से जूझते रहे ललित, नए चेहरों को मिलेगा मौका
ललित उपाध्याय अपने पूरे करियर में शानदार आक्रमणकारी कौशल और गोल करने की क्षमता के लिए जाने जाते थे। उनकी गति, ड्रिब्लिंग और विरोधी डिफेंस को भेदने की क्षमता ने भारतीय टीम को कई महत्वपूर्ण मौकों पर सफलता दिलाई। हालांकि, पिछले कुछ समय से वह लगातार चोटों से जूझ रहे थे, जिसका असर उनके प्रदर्शन पर भी दिख रहा था।
ललित के संन्यास से भारतीय हॉकी टीम में फॉरवर्ड लाइन में एक रिक्त स्थान बन गया है, जिसे भरने की चुनौती टीम प्रबंधन के सामने होगी। हालांकि, यह नए और युवा खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का एक अवसर भी प्रदान करेगा। भारतीय हॉकी महासंघ ने ललित के योगदान की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। ललित उपाध्याय का संन्यास निश्चित रूप से भारतीय हॉकी के लिए एक नुकसान है, लेकिन यह टीम को भविष्य के लिए नई रणनीतियां बनाने और युवा प्रतिभाओं को निखारने का मौका भी देगा।

