निराशा तभी बुझ सकती है जब उसमें उत्साह का नीर डाला जाए

भोपाल। भारत गौरव गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ससंघ ने राजधानी के जिनालयों में वंदना करते हुए अहिंसा विहार जिनालय में भगवान महावीर का अभिषेक, शांतिधारा और अष्टद्रव्य से पूजन किया। श्री जिनसहस्रनाम विधान भी विधिवत संपन्न हुआ।

माताजी ने अपने प्रवचन में निराशा को जीवन का सबसे बड़ा अभिशाप बताते हुए कहा कि इसे दूर करने के लिए उत्साह शक्ति को जागृत करें। उन्होंने कहा, निराशा तभी बुझ सकती है जब उसमें उत्साह का नीर डाला जाए।

भक्ति पर प्रकाश डालते हुए माताजी ने कहा कि भक्ति कोई प्रतियोगिता नहीं, बल्कि परमात्मा से जुड़ने का शांतिपूर्ण मार्ग है। यह आत्मविलय का माध्यम है।

प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि कार्यक्रम में अनिल नायक, विभा सोधरमइंद्र, स्नेहलता पंत सहित कई श्रद्धालुओं ने मंडल पर अरघ अर्पित किए। इस अवसर पर अध्यक्ष प्रमोद चंदेरी, महिला मंडल की दिव्या जैन व अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

 

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