नयी दिल्ली/ जिनेवा , 19 जून (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास संगठन (अंकटाड) की गुरुवार को जारी ताजा विश्व निवेश रिपोर्ट (वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट) के अनुसार 2024 में (विकासशील एशिया) एशिया की विकसित अर्थव्यवस्थाओं में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में कुल मिला कर तीन प्रतिशत की गिरावट के बावजूद यह क्षेत्र दुनिया में एफडीआई का एक प्रमुख क्षेत्र बना रहा। रिपोर्ट के अनुसार 2024 के दौरान वैश्विक स्तर पर एफडीआई में गिरावट दर्ज की गई।
वर्ष के दौरान विकासशील एशिया में एफडीआई प्रवाह एक साल पहले के 622 अरब डॉलर से घट कर 605 अरब डॉलर पर आ गया जो तीन प्रतिशत की कमी दर्शाता है।
एशिया में भी दक्षिण-पूर्व एशिया ,पश्चिम एशिया और एक सीमा तक दक्षिण एशिया क्षेत्र में एफडीआई मजबूत बना रहा। पूर्व एशिया में एफडीआई12 प्रतिशत गिर कर 260 अरब डॉलर, दक्षिण पूर्व एशिया में सालाना आधार पर दस प्रतिशत की वृद्धि के साथ 225 अरब डॉलर, दक्षिण एशिया में एक साल पहले के 35 अरब डॉलर के बराबर ,पश्चिम एशिया में पांच प्रतिशत बढ़ कर 82 अरब डॉलर और तनावग्रस्त पश्चिम एशिया के विकासशील देशों में एफडीआई 61 प्रति गिरावट के साथ तीन अरब डालर रहा।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में पूंजीगत निवेश के मामले में भारत 28 प्रतिशत की वृद्धि के साथ एशिया के विकासशील देशों में सबसे आगे रहा। भारत में इस दौरान घोषित परियोजनाओं में 110 अरब डॉलर का पूंजी निवेश दर्ज किया गया। अज़रबेजान, बहरीन और तुर्की में पूंजीगत निवेश में अच्छी वृद्धि दर्ज की गयी।
वर्ष 2024 में दुनिया भर में शुरू की गयी नयी परियोजनाएं संख्या के हिसाब से करीब एक तिहाई विकासशील एशिया में शुरू हुई। ऐसी परियोजनाओं के मूल्य के हिसाब से इस क्षेत्र का हिस्सा एक चौथाई रहा।
वर्ष के दौरान विकासशील एशिया में नयी परियोजनाओं में संख्या के हिसाब से पांच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी पर मूल्य के हिसाब से ऐसी परियोजनाओं में निवेश 23 प्रतिशत घट कर 363 अरब डालर पर आ गया ।
इस दौरान डिजिटल अर्थव्यवस्था और धातुओं के कारोबार में निवेश बढ़ा लेकिन बिजली, गैस-आपूर्ति और पेट्रोलियम प्रसंस्करण में निवेश में कुल मिला कर 70 अरब डॉलर की कमी दिखी। वर्ष के दौरान विकासशील एशिया में अवसंरचना और लोक सेवा के क्षेत्र के लिए अंतराष्ट्रीय परियोजना ऋण में कमी आयी।
इस बीच 2024 में निवेश के सौदों की संख्या में 27 प्रतिशत की कमी दिखी जो मोटे तौर पर वैश्विक औसत के अनुरूप थी लेकिन मूल्य के हिसाब से इसमें 43 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई।
रिपोर्ट के मुताबिक विकासशील एशिया में सीमा पार की कंपनियों के साथ विलय और अधिग्रहण के सौदे मूल्य के हिसाब से 57 प्रतिशत घटकर 25 अरब डॉलर के बराबर रह गए। इसका मुख्य कारण चीन में ऐसे सौदों के मूल्य में 49 प्रतिशत की गिरावट रही। साल के दौरान भारत से डिज्नी के निवेश की आंशिक निकासी हुई और संयुक्त अरब अमीरात में भी ऐसी निकासी का प्रभाव दिखा।
