
बैतूल जिले के नजदीकी वन ग्राम धाराखोह में सोमवार शाम अचानक आई तेज आंधी ने भारी तबाही मचाई। करीब दो मिनट तक चली आंधी ने गांव की तस्वीर ही बदल दी। दर्जनों पेड़ जड़ से उखड़कर गिर पड़े, जिससे रास्ते बंद हो गए और बिजली के खंभे गिरने से पूरा गांव अंधेरे में डूब गया।
तेज हवाओं से कई मकानों की छतें उड़ गईं, वहीं सरकारी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र की छतों को भी नुकसान पहुंचा है। मुर्गीपालन केंद्र और वन विभाग की नर्सरी भी पूरी तरह तहस-नहस हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि कई लोगों के कच्चे मकानों की पूरी छतें उड़ गईं, जिससे उन्हें खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि हादसे के कई घंटे बाद भी कोई भी अधिकारी या सर्वे टीम गांव नहीं पहुंची है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। हालांकि, गनीमत रही कि इस भयावह आंधी में कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई। प्रभावित ग्रामीणों को अब शासन की राहत का इंतजार है।दो मिनट की आंधी ने मचाई तबाही, बैतूल के धाराखोह में भारी नुकसान
बैतूल जिले के नजदीकी वन ग्राम धाराखोह में सोमवार शाम अचानक आई तेज आंधी ने भारी तबाही मचाई। करीब दो मिनट तक चली आंधी ने गांव की तस्वीर ही बदल दी। दर्जनों पेड़ जड़ से उखड़कर गिर पड़े, जिससे रास्ते बंद हो गए और बिजली के खंभे गिरने से पूरा गांव अंधेरे में डूब गया।
तेज हवाओं से कई मकानों की छतें उड़ गईं, वहीं सरकारी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र की छतों को भी नुकसान पहुंचा है। मुर्गीपालन केंद्र और वन विभाग की नर्सरी भी पूरी तरह तहस-नहस हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि कई लोगों के कच्चे मकानों की पूरी छतें उड़ गईं, जिससे उन्हें खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि हादसे के कई घंटे बाद भी कोई भी अधिकारी या सर्वे टीम गांव नहीं पहुंची है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। हालांकि, गनीमत रही कि इस भयावह आंधी में कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई। प्रभावित ग्रामीणों को अब शासन की राहत का इंतजार है।
