अजय ब्रम्हवंशी
छिंदवाड़ा: शहर के बीचों बीच बहने वाली बोदरी नदी में 15 वर्ष पूर्व साल भर कंचन सा पानी बहता था लेकिन अब यह नदी अपने वजूद को खो चुकी है. बोदरी नदी को अब लोग बोदरी नाला कह कर संबोधित करने लगे है. इसका सबसे बड़ा कारण नदी के आस पास अतिक्रमण, सीवरेज की पाईप लाइन और शहर से निकले वाला गंदा पानी है. बता दे कि कभी बोदरी नदी शहर की जीवन रेखा हुआ करती थी .
बोदरी नदी का नाम सरकारी कागजों में ही है और निगम व प्रशासन की लापरवाही से यह एक नाला बन चुकी है. ऐसे में अब यह सवाल उठता है कि इस नदी के उद्धार के लिए भगीरथ कौन बनेगा. बोदरी नदी में पहले लोग गणेश विर्सजन , दुर्गा विसर्जन करने जाते थे, साथ ही लोग इस नदी में तैराकी का भी लुफ्त उठाते थे, सावन के महिने में तीज के त्योहार पर महिलाएं तीज विर्सजन करने के लिए जाया करती थी. वह पुरानी दिन याद आने पर वे दिन सपना सा दिखाई देते है.
बिछाए गए सीवरेज के पाईप
बता दे कि शहर का गंदा पानी का ट्रीटमेंट करने के लिए प्रशासन ने शहर में सीवरेज की पाईप लाइन बिछाई है. शहर में बिछाए गए पाईप लाइन को बोदरी नदी में बिछाए गए पाईप लाईन से जोड़ दिया गया. बोदरी नदी के नाले में तब्दील होने का सबसे बड़ा कारण यह भी है कि बोदरी नदी में सीवरेज कम्पनी ने गढड़ा खोद कर पाईप लाइन बिछा दी है. नदी में खुदाई करने से यह हालत उत्पन्न हुए है.
कूड़ा-करकट ने प्रदूषित कर दी जल-वायु
शहर का सारा कूड़ा-निस्तारण दोनों नदियों के मुहाने पर ही झोंका जाता है. इससे नदी का जल तो प्रदूषित होता ही है साथ ही आसपास का वातावरण भी दूषित हो गया है. नदी में आवारा मृत पशु, लावारिस लाशें, पॉलीथिन में बंधा कूड़ा ढेर ने नदियों के जल को विषैला बना दिया है.
इनका कहना है
बोदरी नदी का वजूद खतरे में है. नदी आबादी बढऩे से नदी संकीर्ण हो गई है. नदी को पुनर्जीवित करने के लिए शहरवासियों को आवाज उठाना होगी और शासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करना होगा तब कही जाकर बोदरी नदी का हम अस्तित्व बचा पाएगे.
विक्की रायसेन
पर्यावरण प्रेमी , छिंदवाड़ा
