
दमोह।दो भाइयों के विवाद को सुलझाने बजरंगबली ने न्यायाधीश की भूमिका अदा की. लेकिन बुधवार को यह हकीकत में हुआ. मामला दमोह शहर की जबलपुर नाका चौकी के भूरी गांव से जुड़ा है.जानकारी के अनुसार दो सगे में से बड़े भाई गणेश साहू के यहां कोई संतान नहीं थी. इसलिए उन्होंने अपने छोटे भाई राम प्रसाद के बड़े बेटे खुमान को गोद ले लिया, लेकिन कुछ साल बाद जब उस बेटे की शादी हुई तो घर में अनबन शुरू हो गई और गोद लिए बेटे ने अपने बड़े पिता से नाता तोड़ दिया, लेकिन वो अपने साथ बड़े पिता के सोने के जेवर और एक बाइक भी ले आया और इसी के चलते विवाद पुलिस चौकी तक पहुंच गया. जबलपुर नाका चौकी प्रभारी एएसआई आनंद कुमार ने दोनों पक्षों को बुधवार को बुलाकर आपसी समझौता करने कहा, लेकिन दोनों पक्ष ने सुलह के लिए शर्त रखी कि वे पुलिस चौकी में बने मंदिर में विराजमान मौजूद बजरंगबली को न्यायाधीश मानकर समझौता करेंगे और हुआ भी यही जिसके बाद उनके बीच सुलह हो गई.बड़े भाई गणेश साहू ने बताया कि मेरे यहां कोई संतान नहीं थी. अपने भाई के बेटे को 2022 में गोद लिया, लेकिन दो साल बाद 2024 में परिवार में अनबन हो गई, तो मैने भतीजे को वापस भेज दिया.उसके पास मेरा 400 ग्राम चांदी का डोरा, 200 ग्राम चांदी की पायल और 5 ग्राम सोने की झुमकी और एक बाइक थी.भतीजे ने मुझे जेवर वापस कर दिया है, मैंने बाइक के बदले उसे 30000 रुपए दे दिए. गणेश के भतीजे खुमान ने बताया कि 2017 से मैं अपने बड़े पिताजी के साथ भुसावल में रहता था.वहीं मजदूरी भी करता था.2024 में मेरी शादी होने के बाद मेरे बड़े पिता से मेरी पत्नी की अनबन होने लगी और इसलिए मैंने उन्हें छोड़ दिया. जो विवाद था उस पर समझौता हो गया। खुमान के पिता राम प्रसाद ने कहा हम भगवान को मानते हैं इसलिए हमने मंदिर में फैसला किया है. चौकी प्रभारी आनंद कुमार ने हमारे इस विवाद को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की.चौकी प्रभारी आनंद अहिरवार ने बताया कि भूरी गांव के दोनों पक्षों को बुलाकर उनसे आपसी सहमति बनाने पर बात की थी.वो बजरंगबली को न्यायाधीश मानकर समझौता करना चाहते थे.मैंने सहमति दी और उनके बीच समझौता हो गया है. अच्छा हुआ विवाद आपसी समझौते से सुलझ गया और दोनों पक्ष कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने से बच गए.
