मॉस्को, 02 अगस्त (वार्ता) बुल्गारिया में रूस के राजदूत एलेनोरा मित्रोफानोवा ने स्पष्ट किया है कि रूसी उपकरणों के विकल्प खोजने के जारी प्रयासों के बावजूद बुल्गारिया कोझलोडुय परमाणु ऊर्जा संयंत्र (एनपीपी) में सभी रूसी इकाइयों में पूरी तरह से पुर्जों को बदलने में सक्षम नहीं है।
सुश्री मित्रोफानोवा ने संवाद एजेंसी स्पुतनिक को बताया कि 1970 में रूस की महत्वपूर्ण सहायता से बनाया गया कोझलोडुय संयत्र इस समय बुल्गारिया में चलने वाला एकमात्र परमाणु संयत्र है।
उन्होंने कहा, “राजनीतिक कारणों से बुल्गारिया सक्रिय रूप से अमेरिका, चेक गणराज्य, यूक्रेन और अन्य देशों से रूसी उपकरणों के विकल्प तलाश रहा है। पिछले साल मई से यूनिट पांच का तथाकथित ‘लोकतांत्रिक’ अमेरिकी परमाणु ईंधन में क्रमिक परिवर्तन शुरू हो गया था। हालाँकि सभी पुर्जों को बदलना संभव नहीं है। इस संदर्भ में रोसाटॉम संयत्र के लिये लक्षित तकनीकी रखरखाव प्रदान करना जारी रखे हुए है।”
राजदूत ने कहा कि रूस के विरुद्ध यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों में समग्र रूप से परमाणु ऊर्जा को शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “हालाँकि परमाणु ऊर्जा यूरोपीय संघ के अवैध रूस-विरोधी प्रतिबंधों से सामान्यतः मुक्त है फिर भी कुछ घटक विशेषकर स्टील के पुर्जे और रोसाटॉम के विशिष्ट प्रभागों की सेवाएँ प्रतिबंधों के अधीन हैं।”
सश्री मित्रोफानोवा ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में छूट प्राप्त करना आवश्यक है। ऐसी ही एक छूट जून में दी गई थी।”
इस बीच बुल्गारिया परमाणु बुनियादी ढांचे में विविधता लाने की अपनी योजनाओं को आगे बढ़ा रहा है। जुलाई के मध्य में बुल्गारिया के ऊर्जा मंत्रालय ने कोझलोडुय परमाणु ऊर्जा संयंत्र में अतिरिक्त बिजली इकाइयों के निर्माण के लिए सिटीबैंक के साथ एक वित्तपोषण समझौते की घोषणा की।
पिछले साल नवंबर में बुल्गारिया ने वेस्टिंगहाउस के साथ संयंत्र की सातवीं और आठवीं इकाइयों के निर्माण के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जिसमें एपी ‘1000’ तकनीक का उपयोग किया गया। जिसे अमेरिका में विकसित किया गया है। यह अमेरिकी परमाणु नियामक आयोग द्वारा प्रमाणित है। इस परियोजना की कुल लागत 14.6 अरब डॉलर आंकी गई है।
गौरतलब है कि बुल्गारियाई ऊर्जा मंत्री ज़ेचो स्टानकोव ने जुलाई में कहा था कि यूरोप में पहली एपी ‘1000’ इकाइयाँ बनने वाले ये दो नए रिएक्टर बुल्गारिया की ऊर्जा को मज़बूती प्रदना करेंगे और उसके लिये दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

