
ओस्लो 04 जून (वार्ता) केन्द्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मंगलवार को यहां कहा कि भारत ने ‘सागर’ परियोजना की सफलता के आधार पर महासागर की घोषणा की है जो व्यापक समुद्री सहयोग और समग्र विकास की ओर भारत की सोच को दर्शाता है।
श्री सोनोवाल ने नॉर्वे और डेनमार्क की पाँच दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान ‘शिपिंग और ओशन बिजनेस’ बैठक में भारत की महासागर सोच को दोहराया। उन्होंने ‘भविष्य के निर्माण में शिपिंग की भूमिका’ विषय पर एक मंत्री स्तरीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस बैठक में उद्योग को एक स्थिर, दीर्घकालिक नियामक वातावरण अपनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया, जिससे समावेशी और कार्बन मुक्त महासागरीय व्यापार को बढ़ावा मिले। ब्राज़ील, जापान, संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, चीन और नॉर्वे के मंत्री भी इस बैठक में शामिल हुए।
श्री सोनोवाल ने कहा कि सागर की सफलता के आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महासागर की घोषणा की। यह व्यापक समुद्री सहयोग और समग्र विकास की ओर भारत की सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सागरमाला 2.0 कार्यक्रम बुनियादी ढांचे की खामियों को दूर करने, जहाज निर्माण, मरम्मत और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक समुद्री नेतृत्व में लाने पर केंद्रित है। भारत की ‘शिपिंग और ओशन बिजनेस’ पर सोच पारस्परिक और समग्र विकास को बढ़ावा देना है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग, स्थिरता और हरित पहल शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘सभी के लिए विकास’ की भारत की सोच को सागर के रूप में व्यक्त किया, जिसका मतलब है क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के विशाल समुद्री तट, रणनीतिक स्थिति और समुद्री विरासत का उपयोग कर आर्थिक समृद्धि, क्षेत्रीय सुरक्षा और सतत विकास को बढ़ावा देना है। इसमें आर्थिक सहयोग, क्षमता निर्माण, आपदा प्रबंधन, सूचना साझा करना और पर्यावरण संरक्षण शामिल है।
इसके अतिरिक्त श्री सोनोवाल ने नॉर्वेजियन शिप ओनर्स (एनएसए) के साथ बैठक की और भारत के समुद्री क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने एनएसए अध्यक्ष हेराल्ड फोटलैंड का धन्यवाद करते हुए भारत और नॉर्वे के साझा मूल्य स्थिरता, नवाचार और साझेदारी को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “भारत का समुद्री क्षेत्र परिवर्तन के दौर में है, जो स्थिरता, नवाचार और वैश्विक साझेदारी से प्रेरित है। हम नॉर्वे के साथ सहयोग बढ़ाकर एक हरित, स्मार्ट और लचीला समुद्री इकोसिस्टम बनाना चाहते हैं। हरित बंदरगाहों, ग्रीन हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ईंधनों और रणनीतिक प्रोत्साहनों में बड़े निवेश के साथ भारत का लक्ष्य है कि वह जहाज निर्माण में वैश्विक नेता बने।”
