जबलपुर: समर्थन योजना के तहत विपणन वर्ष 2025-26 के लिए मूंग एवं उड़द फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर जिला प्रशासन और कृषि विभाग के अधिकारी अभी कोई तैयारी में नहीं है जबकि वह अभी उपार्जन नीति का इंतजार कर रहे हैं। इसके विपरीत किसानों द्वारा लगाई गई फसल तैयार हो चुकी है, जो अब प्राइवेट रूप में ले जाकर मंडियों में उड़द मूंग को बेच रहे हैं। हालांकि किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री कमल पटेल ने यह जानकारी दी है कि मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन फसलों, मूंग और उड़द के लिए उपार्जन पंजीयन के लिए 4 से 15 जून तक पंजीयन किया जाएगा। यह पंजीयन ई-उपार्जन पोर्टल पर होगा। लेकिन जिले में अभी तक पंजीयन की कोई तैयारी नहीं है।
किसान गल्ले में रखकर बैठा फसल
किसानों से मिली जानकारी के अनुसार गर्मी के मौसम में उड़द और मूंग की फसल तैयार हो चुकी है, और कटाई भी हो गई है। जिसके बाद किसान अब उपार्जन के इंतजार में अपनी फसल को गल्ले में रखा हुआ है। लेकिन बार बार बदल रहे मौसम के कारण किसान चितिंत भी और वह चाहते हैं कि बारिश शुरू होने से पहले उनकी फसल बिक जाए।
मंडियों में पहुंच रहे किसान
शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर अभी समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू नहीं हो पाई है, परंतु किसानों की फसल कटकर तैयार हो चुकी है और वह इसे बचने के लिए लगे हुए हैं। खासतौर पर किसान मंडियों और प्राइवेट रुप से व्यापारियों को उड़द और मूंग बेच रहे हैं। जिससे उनको अच्छा खासा रेट भी इन फसलों का मिल रहा है। पिछ्ले हफ्ते से लेकर अभी तक जिले की सभी मंडियों में किसानों द्वारा उड़द बड़ी मात्रा में लेकर पहुंच रहे हैं। जिसमें जबलपुर की कृषि उपज मंडी और पाटन मंडी में मूंग की भरमार है, जहां पर किसानों को लगभग 6000 रूपए प्रति क्विंटल का रेट मिल रहा है।
इनका कहना है
फिलहाल अभी तक कोई भी नीति या पंजीयन शुरू होने की जानकारी नहीं मिली है। जिसके कारण अभी तक उड़द और मूंग का उपार्जन नहीं हो रहा है।
एस के निगम, उप संचालक कृषि
