सरमा ने बगलादेशियों को वापस भेजने को उचित ठहराया

गुवाहाटी, (वार्ता) असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद केवल घोषित विदेशियों को ही बंगलादेश वापस भेज रही है।

मुख्यमंत्री का यह बयान उस वीडियो के वायरल होने के कुछ दिनों बाद आया है जिसमें कुछ लोग भारत और बंगलादेश की सीमा के बीच ‘नो मैन्स लैंड’ पर देखे गए थे, जहां एक व्यक्ति, खैरुल इस्लाम ने दावा किया कि वह एक भारतीय नागरिक है जिसे बंगलादेश भेजा जा रहा है। इस्लाम उन नौ लोगों में से एक है जिन्हें हाल ही में असम के मोरीगांव जिले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार शाम एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें वापस भेजने का काम शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने हमें निर्देश दिया है कि घोषित विदेशी नागरिकों को वापस भेजा जाना चाहिए। हमें उन सभी घोषित विदेशियों को वापस भेजने के लिए कहा गया है जिन्होंने न्यायालय में अपील नहीं की है। उन्होंने आगे कहा कि असम पुलिस ने हाल ही में सिलचर और मेघालय सीमा के पास से 35 बंगलादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया और उन्हें वापस भेज दिया।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने अवैध विदेशियों का पता लगाने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्णय लिया है।

जहां तक श्री इस्लाम की बात है, जो मोरिगांव में एक शिक्षक थे, उन्हें 2016 में एक विदेशियों के न्यायालय द्वारा विदेशी घोषित किया गया। हालांकि उन्होंने एफटी के फैसले को चुनौती दी और उच्च न्यायालय में गए, गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने 2018 में एफटी के फैसले को बरकरार रखा, जिसके परिणामस्वरूप उनकी गिरफ्तारी हुई।

श्री इस्लाम के परिवार के सदस्यों ने कहा कि उन्होंने उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है और अपील अभी भी लंबित है।

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