कोरोना वायरस : नया वेरिएंट, नई चुनौती

भारत एक बार फिर कोरोना संक्रमण की हल्की लेकिन अहम दस्तक से दो-चार हो रहा है.वायरस की वापसी इस बार जेएन.1 और बीए.2.86 जैसे नए ओमिक्रॉन वेरिएंट्स के रूप में हुई है. देशभर में सक्रिय मामलों की संख्या अब भी सीमित है,लगभग 323 एक्टिव केस, लेकिन संक्रमण की यह धीमी रफ्तार भी चेतावनी के स्वर में है.

मध्यप्रदेश में फिलहाल 6 एक्टिव केस दर्ज हुए हैं. इनमें अकेले इंदौर में 5 मरीजों की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने की है, जबकि एक मरीज उज्जैन से सामने आया है.इंदौर की स्वास्थ्य व्यवस्था इस समय चौकन्नी है, लेकिन राजधानी भोपाल की स्थिति कुछ और ही कहानी कहती है.भोपाल के जेपी अस्पताल और गांधी मेडिकल कॉलेज में अब तक कोरोना संदिग्ध मरीजों की जांच शुरू नहीं हो पाई है. अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अभी तक स्वास्थ्य विभाग से जांच संबंधी आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं.केवल एम्स भोपाल में कोविड जांच और प्रबंधन की व्यवस्था सक्रिय रूप से लागू है.

चौंकाने वाली बात यह है कि गांधी मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित स्टेट वायरोलॉजी लैब, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 5 करोड़ रुपए की आधुनिक जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन सौंपी गई थी, वह मशीन आज भी उपयोग की बाट जोह रही है. लैब प्रशासन ने आरटी-पीसीआर किट्स की कमी की ओर भी शासन का ध्यान दिलाया है.यह सब उस समय हो रहा है जब वायरस की प्रकृति को समझने और उसके प्रसार की दिशा जानने के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग सबसे अहम माध्यम है.

जेएन.1 वेरिएंट, ओमिक्रॉन के बीए.2.86 का सब-वेरिएंट है.यह सबसे पहले अगस्त 2023 में सामने आया था और दिसंबर 2023 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया. इसमें लगभग 30 म्यूटेशन हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करते हैं.

अमेरिका की जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के अनुसार, यह वेरिएंट बहुत तेजी से फैलने वाला जरूर है, लेकिन इससे होने वाली बीमारी सामान्यत: गंभीर नहीं होती.इसके लक्षण कुछ दिनों से लेकर हफ्तों तक रह सकते हैं, और यदि लंबे समय तक बने रहें तो यह लॉन्ग कोविड का संकेत हो सकता है. हालांकि  भोपाल एम्स के वरिष्ठ चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि भले ही यह वेरिएंट गंभीर न हो, लेकिन यह लापरवाही की अनुमति नहीं देता. उनका कहना है कि जितना ज्यादा हम संक्रमित मरीजों की पहचान कर पाएंगे और उनके सैंपल्स की जीनोम सीक्वेंसिंग कर पाएंगे, उतनी ही प्रभावी हमारी रणनीति होगी.

यह जरूरी है कि राज्य सरकार जांच की प्रक्रिया में तेजी लाए और स्वास्थ्य संस्थानों को उचित संसाधन और स्पष्ट निर्देश तत्काल उपलब्ध कराए जाएं. कुल मिलाकर हमें याद रखना चाहिए कि महामारी की पिछली लहरों में हमने जिस अनुशासन और सहयोग से काम लिया था, वही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है. देश के नागरिकों को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन स्वस्थ नागरिक होने की जिम्मेदारी को फिर से अपनाने की आवश्यकता है.

यह वायरस हमारे शरीर से अधिक हमारी लापरवाही पर हमला करता है. मास्क, हाथ धोने की आदत, भीड़ से बचाव—ये सब आज फिर से हमारे स्वास्थ्य कवच बनने चाहिए. मीडिया की भूमिका यहां भय नहीं, सजगता का संदेश देने की है, और नीति-निर्माताओं की जिम्मेदारी है कि वे समय रहते निर्णय लें.

हमें न कोई अफवाह फैलानी है, न ही शांति का मुखौटा पहनकर सो जाना है. यह समय है संतुलित सतर्कता का,न तो अति-संवेदनशीलता, न ही उदासीनता.दरअसल, देश का अधिकांश हिस्से में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है. ऐसे में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए. भीड़भाड़ वाली जगह पर मास्क लगाकर जाना चाहिए. ध्यान रखना चाहिए कि सावधानी ही इसका सबसे प्रभावी उपचार है.

 

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