अश्लील सामग्री पर रोक का साहसिक कदम

भारत सरकार द्वारा 25 ओटीटी प्लेटफॉम्र्स पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है. यह स्पष्ट संदेश देता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अश्लीलता और पोर्नोग्राफी को बढ़ावा देना किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है.

डिजिटल युग में ओटीटी प्लेटफॉम्र्स ने भारतीय मनोरंजन जगत को नई दिशा दी है. परंतु कुछ प्लेटफॉम्र्स ने इस स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर अश्लील, आपत्तिजनक और यौन उत्तेजक सामग्री परोसने का धंधा बना लिया. इससे न केवल भारतीय संस्कृति को चोट पहुंची, बल्कि युवा पीढ़ी के नैतिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा. सरकार का मानना है कि ये प्लेटफॉम्र्स बार-बार चेतावनी के बावजूद अपनी प्रवृत्ति से नहीं हटे, जिससे कठोर कार्रवाई अनिवार्य हो गई.

इस प्रतिबंध के कानूनी आधार बेहद मजबूत हैं. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67 और 67्र अश्लील और यौन सामग्री के प्रसार पर स्पष्ट रोक लगाती हैं. साथ ही, आईटी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 का उल्लंघन भी इन प्लेटफॉम्र्स द्वारा किया गया था. यह कानून सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि लागू करने का साहसिक उदाहरण सरकार ने पेश किया है.

मनोरंजन का उद्देश्य संस्कृति को समृद्ध करना है, न कि समाज में विकृति फैलाना. बच्चों और किशोरों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म नई शिक्षा और ज्ञान का स्रोत बन सकते हैं, लेकिन जब यह माध्यम अश्लीलता का गढ़ बन जाए, तो राष्ट्रहित में हस्तक्षेप अनिवार्य हो जाता है. यह कार्रवाई उन परिवारों की भी आवाज है जो लंबे समय से इन प्लेटफॉम्र्स की बेहूदा सामग्री को लेकर चिंतित थे.कुछ लोग तर्क देंगे कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार है. लेकिन यह भूलना नहीं चाहिए कि किसी भी लोकतंत्र में स्वतंत्रता का दायरा सामाजिक और कानूनी मर्यादाओं से बंधा होता है. भारतीय संविधान में भी स्वतंत्रता के साथ-साथ जिम्मेदारी का प्रावधान है.यह कदम डिजिटल स्पेस को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा. अब आवश्यकता है कि सरकार एक सशक्त डिजिटल कंटेंट रेगुलेशन फ्रेमवर्क विकसित करे, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति न उत्पन्न हो. साथ ही, ओटीटी प्लेटफॉम्र्स को पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ गुणवत्तापूर्ण सामग्री प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए.कुल मिलाकर भारत सरकार का यह निर्णय केवल अश्लीलता के खिलाफ कदम नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की नैतिक रीढ़ को मजबूत करने का प्रयास है. डिजिटल स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं कि समाज के मूल्यों को कुचल दिया जाए. यह कार्रवाई अन्य डिजिटल प्लेटफॉम्र्स के लिए एक सख्त चेतावनी है कि भारतीय संस्कृति और कानून से खिलवाड़ करने वालों के लिए कोई छूट नहीं है. दरअसल, सरकार का मानना है कि ये प्लेटफॉर्म मनोरंजन की आड़ में ऐसी सामग्री दिखा रहे थे जो भारतीय कानून और सामाजिक मर्यादाओं के खिलाफ है, और बच्चों तथा भारतीय संस्कृति के लिए ठीक नहीं है. यह ध्यान रखना होगा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर सरकार को चाइल्ड पॉर्नोग्राफी और सोशल मीडिया तथा ओटीटी पर दिखाई जा रही अश्लील सामग्री पर रोक लगाने की सलाह दी है. जाहिर है सरकार का यह कदम प्रशंसा योग्य है.

 

 

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