सशक्तिकरण: कान्हा नेशनल पार्क की परवरिश में ग्रीन सोल्जर्स की भूमिका में हैं वन रक्षक महिलाएं 

बालाघाट। आज विश्व में कान्हा नेशनल टाईगर पार्क की प्रसिद्धि और उपलब्धि में कई ग्रीन सोल्जर्स का बड़ा अहम योगदान हैं। जहां हर भारतीय और विदेशी भी सफारी के लिए लालायित रहते हैं। इस प्रसिद्धि व उपलब्धि में महिला ग्रीन सोल्जर्स की परवरिश का बड़ा हाथ है। कान्हा नेशनल टायगर पार्क में 55 महिला ग्रीन सोल्जर्स की देखरेख में वन और वन्य जीव सुरक्षित है। एक ऐसी ही महिला ग्रीन सोल्जर है शिक्षा जो फिलहाल समनापुर रेंज के बफर जोन में वन रक्षक की भूमिका में है। शिक्षा वनों की सुरक्षा बड़ी ईमानदारी से करती है, तभी तो वो अपने कार्य क्षेत्र जंगल में भी अपने 1 वर्ष के बालक के साथ देखी जा सकती है। जबकि वो जानती भी यह जोखिम से भरा जंगल है। क्योंकि मधुमक्खी के हमले में उनकी जान बड़ी मुश्किल से बची है। उनकी ही तरह पुष्पलता तराम भी सजग और पूरी चौकसी के साथ कान्हा कोर क्षेत्र में तैनात है। इसी जंगल में 3 वर्ष पहले उनके पति की मृत्यु हुई। इसके बावजूद उन्हें इस जंगल से बड़ा लगाव है। इसी लगाव के साथ पुष्पलता कान्हा के वन्य जीवों की सुरक्षा में बड़ी सतर्कता के साथ काम लेती है।

परिवार से 250 किमी.अकेली जंगल और देहात में कर जंगल में सेवा

ग्रीन सोल्जर शिक्षा सोनी कान्हा नेशनल टाइगर पार्क के कोर व बफर जोन रेंज में तैनात है। उनका पूरा परिवार यहां से 250 किमी.छिन्दवाड़ा में है। इसके बावजूद वो 9 वर्षो से सेवा कर रही है। उन्होंने जंगल सुरक्षा का किस्सा बताया कि कैसे मधुमक्खियों ने हमला किया और जान बची। वाक्या गढ़ी रेंज का है, यहां टाइगर ने बैल का शिकार कर जंगल मे छोड़ दिया था। किसान को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए प्रक्रिया पूरी करनी थी। जब वो अवलोकन कर रही थी, तभी मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। ऐसी स्थिति में पेड़ के समान खड़े रही। ताकि मधुमक्खियां और क्रोधित न हो, लेकिन एक साथ मधुमक्खियों के हमले से बुरी तरह शरीर पर ढंक मारे। ऐसी स्थिति में रेंजर को हेल्प के लिए बुलाया गया। इसके बाद 10 दिनों तक उपचार के बाद आराम हुआ। ऐसे कई किस्से है, जब उनका सामना बाघ व अन्य वन्य जीवों के साथ हुआ। फिर भी वो आज भी जंगल बचाने के लिए अपने बच्चें को साथ लेकर ड्यूटी पर तैनात रहती है।

कान्हा में खोया पति को अब उसी जंगल को बचाने में पुष्पलता आगे

ग्रीन सोल्जर पुष्पलता की अपनी एक अलग कहानी है। पुष्पलता के पति चुन्नीलाल की वर्ष 2023 कान्हा में ही मृत्यु हुई थी। यहां कोर इलाके में गश्त के दौरान अचानक तबियत खराब हुई, लेकिन वहां नेटवर्क नही होने से समय पर इलाज नही मिल पाया। पति की मृत्यु के बाद ही बड़ा बेटा भी चल बसा। परिवार में हर तरह से परेशानियों के बाद पुष्पलता ने पति की कर्मभूमि को ही अपना लिया। 2023 से पुष्पलता प्रतिदिन 12 से 15 किमी. उसी जंगल व वन्य जीवों की परवाह में लगी है। जैसे-उनके पति कोई अधूरा काम छोड़ गए। जिसे पुष्पलता ग्रीन सोल्जर के रूप में पूरा कर रही है।

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