विन्ध्य की डायरी
डॉ रवि तिवारी
वर्षों बाद रीवा में आयोजित मध्यक्षेत्र के प्रशिक्षण वर्ग के दौरान संघ प्रमुख डॉ मोहनराव भागवत का तीन दिवसीय प्रवास विन्ध्य की राजनीति का परिदृश्य बदल सकता है. जानकारों की अगर माने तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ध्यान वर्तमान में भविष्य की व्यवस्थाओं पर ज्यादा है. संघ ने अपने शताब्दी वर्ष में आंतरिक तौर पर देश के पुनर्निर्माण की जो संकल्पना तैयार की है. उसमें आने वाली पीढ़ी को समाज जीवन से जोडऩे और समाज के बीच से ऐसे पात्र व्यक्तियों का चयन करना है जो देश की उन निष्ठाओं में खरे उतर सके जो आने वाली अपेक्षाओं को पूरा कर सकते हैं.
पहले भी संघ ने सैकड़ो ऐसे व्यक्तित्व तैयार कर समाज के बीच भेजे हैं जो वर्तमान में अपने सतत प्रयासों से संघ की रीति-नीति को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आगे बढ़ा रहे हैं. इस बार के संघ प्रमुख के प्रवास से ऐसी उम्मीद बनी है कि राजनीति के क्षेत्र में कुछ नए चेहरों को बड़े अवसर मिल सकते हैं. जो फिलहाल विन्ध्य के होने के बावजूद सक्रिय भूमिका से ओझल हैं. इसके अलावा कुछ लोगों को वर्तमान में मिल रहा अनैतिक महत्व भी घट सकता है. यह समय के साथ सबके सामने आएगा, फिलहाल उसकी चर्चा कयास से ज्यादा कुछ नही है.
पालक मंत्री को सांसद-विधायको ने घेरा
भाजपा में इन दिनों कुछ ठीक-ठाक नही चल रहा है. संगठन और सत्ता में तालमेल नही बन पा रहा है. सिंगरौली की पालक मंत्री संपतिया उईके की कार्यप्रणाली से भी सांसद के साथ-साथ अधिकांश विधायक खफा हैं. करीब चार महीने से अधिकांश विधायक किसी न किसी जगह प्रभारी मंत्री पर परोक्ष रूप से इशारेे-इशारे में निशाना साधते रहे, लेकिन पिछले एक पखवाड़े से सांसद एवं कुछ विधायकों के प्रभारी मंत्री के प्रति नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है.
हालांकि मंच पर खुलकर विरोध नही कर रहे थे. भाजपा प्रबंध समिति के बैठक में सांसद व विधायको की नाराजगी सामने आई है. पारा पहले से ही गरम था बैठक में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के तबादले पर चर्चा हुई. तभी विधायक भडक़ गये और जमकर खरी खोटी सुनाई, फिर क्या था विधायको के कड़े तेवर देख प्रभारी मंत्री को भी पसीने छूटने लगे. विधायको ने कहा इस तरह की मनमानी नही चलेगी. अभी तक जो हुआ, वह ठीक नही है. आगे के लिए ऐसी गलती न दोहराई जाये.
नेताजी पहुंच गए सलाखों के पीछे
सावधान , आप स्वतंत्र भारत में निवास कर रहे है पर स्वतंत्र रूप से किसी पर अभद्र या अमर्यादित टिप्पणी करने की स्वतंत्रता नही है . ऊर्जाधानी के कांग्रेस नेता राम शिरोमणि ने आरएसएस के खिलाफ अभद्र टिप्पणी कर दी तो बवाल मच गया. मामला थाने तक पहुंचा, फिर क्या था पुलिस ने तत्परता बरतते हुए नेताजी को सलाखो के पीछे पहुंचा दिया. नेताजी शायद यह भूल गये थे कि वह मंत्री विजय शाह नही है जो देश की बहादुर बेटी का अपमान कर छिप जाएंगे और पुलिस चिराग लेकर खोजती रहेगी
