नई दिल्ली | 09 जनवरी, 2026: बहुचर्चित ‘जमीन के बदले नौकरी’ (Land for Job) घोटाले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें गहरा गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद, मीसा भारती और तेजप्रताप यादव समेत कुल 41 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह पूरी साजिश एक ‘अपराधिक गिरोह’ की तरह रची गई थी। हालांकि, साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने 52 अन्य लोगों को इस मामले से बरी भी किया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में नियमित मुकदमा शुरू होगा, जो लालू परिवार के राजनीतिक भविष्य के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के अनुसार, यह घोटाला साल 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उस दौरान मुंबई, जबलपुर, जयपुर और हाजीपुर जैसे विभिन्न रेलवे जोनों में ग्रुप-डी के पदों पर नियुक्तियां करने के बदले उम्मीदवारों से जमीन ली गई थी। जांच एजेंसी का दावा है कि नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों या उनके परिजनों ने अपनी कीमती जमीनें बेहद मामूली कीमतों पर या ‘गिफ्ट डीड’ के माध्यम से लालू परिवार के सदस्यों और उनकी कंपनी ‘एके इंफोसिस्टम्स’ के नाम ट्रांसफर की थीं। कई मामलों में तो नियुक्ति पत्र जारी होने से पहले ही जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई थी।
सीबीआई की चार्जशीट में सिर्फ लालू और उनके बेटों का ही नहीं, बल्कि उनकी बेटियों—सांसद मीसा भारती और हेमा यादव का भी नाम प्रमुखता से शामिल है। जांच में सामने आया कि लालू के करीबी भोला यादव ने गांवों में जाकर लोगों को नौकरी का लालच देकर जमीनें लिखवाई थीं। आरोपियों ने दावा किया था कि उन्हें जमीन के बदले नकद भुगतान मिला, लेकिन एजेंसी इसे अवैध लाभ मान रही है। आज सुनवाई के दौरान लालू यादव अपनी बेटी और बेटे के साथ कोर्ट में मौजूद रहे। कोर्ट की इस कार्रवाई के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है और विपक्षी दल इस्तीफे की मांग तेज कर रहे हैं।

