जबलपुर: राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जबलपुर जिला अस्पताल में कार्यरत डी ई आई सी की टीम ने एक बार फिर से एक पीड़ित परिवार के आंसू पोछते हुए एक नवजात बच्ची की धड़कनों को मजबूत करने का काम किया है।दरअसल जबलपुर से भारतीय सेवा में पदस्थ राहुल कुशवाहा जो की जबलपुर के अधारताल सीओडी कॉलोनी में रहते हैं। उन्हें एक माह पहले एक पुत्री रत्न की प्राप्ति हुई थी, बच्ची के पैदा होने के तत्काल बाद ही राहुल कुशवाहा को बॉर्डर पर बुला लिया गया, जिसके चलते अपनी बच्ची को ढंग से देख भी ना पाए। इधर कुछ समय बाद जब बच्ची का उपचार किया गया तो डॉक्टरों ने बच्ची के दिल में छेद का होना बताया।
डॉक्टरों द्वारा दी गई जानकारी के बाद पूरे परिवार में दुख और चिंता का माहौल बन गया। वहीं कहीं से परिजनों को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत दिए जाने वाले उपचार की जानकारी मिली। इसके बाद नवजात के परिजनों ने तत्काल ही जिला अस्पताल विक्टोरिया स्थित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के कार्यालय में जिला प्रबंधक सुभाष शुक्ला से फोन पर बातचीत की। क्योंकि विभागीय कार्यालय शाम को बंद हो जाता है इसलिए परिजनों से फोन पर बातचीत होने के बाद तत्काल सुभाष शुक्ला ने अपनी टीम को न केवल ऑफिस बुलवाया बल्कि ऑफिस खुलवाते हुए बच्ची के अग्रिम उपचार के लिए कागजी कार्यवाही पूर्ण कराई।
जैसे ही इस पूरे मामले की जानकारी जिला प्रबंधक सुभाष शुक्ला द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा को दी गई उन्होंने भी अपने सारे कार्यों को दरकिनार करते हुए सीधे आरबीएस के कार्यालय का रुख किया। देर शाम बंद हो चुके सभी कार्यालय में अचानक से चहल-पहल होने लगी। कार्यालय पहुंचे सीएमएचओ डॉक्टर संजय मिश्रा ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से अवगत कराते हुए बच्ची के उपचार से जुड़े संपूर्ण दस्तावेजों को तैयार कराया और विभागीय सील सिक्का लगाकर। बच्ची को उपचार के लिए मुंबई रवाना किया।
चेहरे पर फिर से लौटी मुस्कान
पीड़ित परिवार ने जानकारी देते हुए बताया कि नवजात बच्ची के पिता सीमा पर तैनात है और इधर बच्ची को इतनी गंभीर बीमारी से जूझना पड़ रहा है। पहले तो हमें बहुत घबराहट हुई, हमें समझ ही नहीं आ रहा था कि हम इस संकट से कैसे उबरेगे लेकिन उसके बाद हमें राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के विषय में जानकारी मिली। किसी शुभचिंतक ने हमें जिला प्रबंधक सुभाष शुक्ला का फोन नंबर दिया। हमें उम्मीद ही नहीं थी कि महज आधे घंटे के अंदर बंद हो चुका कार्यालय दोबारा खुलेगा और हाथों हाथ बच्ची के उपचार के सारे दस्तावेज तैयार कर दिए जाएंगे। जैसे ही पीड़ित परिवार के हाथ में बच्ची के उपचार से जुड़े हुए दस्तावेज दिए गए पीड़ित परिवार के चेहरे पर एक बार फिर से मुस्कान लौट आई।
