इंदौर: हेड कॉन्स्टेबल विनोद यादव की संदिग्ध आत्महत्या के मामले में पूछताछ के घेरे में आई महिला ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया. महिला ने पुलिस को बताया कि वह विनोद से लंबे समय से संपर्क में थी और घटना वाले दिन वह सिर्फ कुछ पैसे देने आई थी. पुलिस ने बुधवार रात हिरासत में लेकर करीब 20 घंटे पूछताछ की, लेकिन गुरुवार शाम को उसे बिना किसी आरोप के छोड़ दिया था.
पूछताछ में शालू ने साफ किया कि वह विनोद की मित्र थी, और उस दिन दोनों के बीच किसी विवाद या तनाव की स्थिति नहीं थी. उसने यह भी बताया कि पुलिस को सूचना देने वाली पहली व्यक्ति वही थी, जब विनोद का शव देखा. इधर, विनोद की पत्नी ने भी पुलिस को बताया कि घटना से कुछ घंटे पहले पति से फोन पर सामान्य बातचीत हुई थी, जिसमें आत्महत्या जैसा कोई संकेत नहीं था. परिवार की ओर से अब तक किसी ठोस आरोप या ब्लैकमेलिंग की शिकायत नहीं की है.
एसीपी सोनू डाबर ने बताया कि महिला के मोबाइल में विनोद से हुई कॉल्स और कुछ मैसेज जरूर मिले हैं, लेकिन सिर्फ इसी आधार पर किसी अपराध की पुष्टि नहीं की जा सकती. विनोद का मोबाइल फिलहाल लॉक है, जिसे खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं. घटना के वक्त विनोद की पत्नी और बच्चे हरियाणा में थे. ऐसे में उनके रिश्तेदारों ने इंदौर पहुंचकर पोस्टमॉर्टम कराया और फिर शव को हरियाणा ले गए. पुलिस ने अंतिम संस्कार की व्यवस्था और आर्थिक सहयोग भी दिया. पुलिस अब मोबाइल डेटा, पारिवारिक बयान और तकनीकी सबूतों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है. मामले में एसीपी डाबर का कहना है कि हर एंगल से जांच की जा रही है, लेकिन अभी तक किसी पर आपराधिक आरोप तय नहीं किए गए हैं.
