जबलपुर:आज से दो वर्षों पूर्व स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए रेलवे द्वारा वन स्टेशन-वन प्रोडक्ट स्कीम की शुरुआत की गई थी। इसके तहत देश के लगभग सभी बड़े स्टेशनों पर स्थानीय शिल्प और कला से बने सामानों को प्रमोट करने की लिए जगह दी गई थी। शुरू में तो केवल इन स्टॉलों से स्थानीय कलाकृतियों को ही बेचा जा रहा था, लेकिन धीरे-धीरे यह स्कीम अपने उद्देश्य से भटक गई।
बात करें अगर मुख्य रेलवे स्टेशन में लगाए गए वन स्टेशन-वन प्रोडक्ट के स्टॉल में अब खान-पान की सामग्री से लेकर हर तरह का सामान बेचा जा रहा है। जिसके चलते स्थानीय हस्त शिल्प कला अब गायब हो चुकी है, या फिर उन्हें सिर्फ दिखावे के लिए स्टॉल में सजाकर रखा गया है। वही मदन महल स्टेशन पर स्थित एक स्टेशन एक उत्पाद काउंटर के तो हाल और भी ज्यादा अराजक हो चुके हैं। इस काउंटर में सिर्फ चार टी-शर्ट टांग दी गई है, इस काउंटर को देखकर ऐसा लगता है कि मानो इसका एक स्टेशन एक उत्पाद स्कीम से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं है।
नाम की रह गई है स्कीम
मुख्य रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म छह में भी वन स्टेशन-वन प्रोडक्ट के तहत स्टॉल खोलने के लिए जगह दी गई थी। इस स्टॉल में अभी भी हस्तशिल्प कला के नमूने बांस से बने खिलौने ऊपरी हिस्से में दिख जाते हैं, लेकिन नीचे अंदर से लेकर बाहर तक सिर्फ खाने की सामग्री सजी हुई है। कहीं क्रीम रोल तो कहीं चिप्स कुरकरे के पैकेट्स नजर आ रहे हैं। इनकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
इनका कहना है
मुख्य रेलवे स्टेशन एवं मदन महल स्टेशन पर स्थित एक स्टेशन एक उत्पाद काउंटर का निरीक्षण करवाया जाएगा।
हर्षित श्रीवास्तव, सीपीआरओ, पश्चिम मध्य रेल
