
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में पूर्व से विचाराधीन जमीन विवाद संबंधी प्रकरण में दूसरे पक्ष ने एक आवेदन प्रस्तुत कर वरिष्ठ भाजपा नेत्री मेनका गांधी के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत व जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ के समक्ष यह मामला बुधवार को सुनवाई के लिए नियत है। मामला मेनका गांधी और उनके ममेरे भाई वीएम सिंह के बीच कानूनी लड़ाई से संबंधित है। विगत सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मेनका और उनकी बहन अंबिका शुक्ला की अपील पर अनावेदक भोपाल निवासी वीएम सिंह, कलेक्टर भोपाल व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने सभी पक्षों को अपनी अपनी लिखित दलीलें पेश करने कहा था।
वीएम सिंह की ओर से पक्ष रख रहे अधिवक्ता उमेश त्रिपाठी ने अवगत कराया कि मेनका गांधी ने हाईकोर्ट में झूठा शपथ पत्र प्रस्तुत कर अपील दायर की है। मेनका पर आरोप हैं कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 2005 के अंतिम फैसले की प्रति संलग्न करने की बजाए केवल एक आवेदन का आदेश पेश किया है। मेनका ने तथ्य छिपाकर हाईकोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की है। मांग की गई है कि मेनका के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर पुलिस जांच कराई जाये, मेनका गांधी व उनकी बहन अंबिका की ओर से पक्ष रख रहे अधिवक्ता आदिल उस्मानी ने बताया कि भोपाल की हुजूर तहसील के अंतर्गत लाउखेड़ी की जमीन पर मेनका के ममेरे चचेरे भाई ने पूर्व में हाईकोर्ट से नामांतरण करवाने का एक आदेश करवाया। इस मामले में उन्होंने मेनका व उनकी बहन को पक्षकार नहीं बनाया। उनकी जानकारी में लाये बिना ही जमीन का नामांतरण अपने नाम करा लिया। जिस पर यह अपील दायर की गई है। जबकि दूसरी ओर वीएम सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन व उमेश त्रिपाठी ने घोर आपत्ति जताई। उन्होंने दलील दी कि मेनका अनावश्यक आपत्ति पेश कर रही हैं। मेनका की मां अमतेश्वर की जिन आपत्तियों को सुप्रीम कोर्ट निरस्त कर चुकी हैं, पुन: वही आपत्ति लगाई जा रही है। दलील दी गई कि अपील 1691 दिन के विलंब से की गई, इसलिए उसे निरस्त किया जाए। उन्होंने बताया कि मेनका की मां ने मध्य प्रदेश की सभी संपत्तियों से स्वयं और वारिसानों का हक त्याग कर दिया था और ये जमीनें वीएम सिंह के नाम कर दी गई थीं। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।
