
इंदौर. शहर में नकली नोटों के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. डीसीपी जोन-03 की अगुवाई में पुलिस ने वॉट्सऐप के माध्यम से नकली नोटों का सौदा कर रहे दो युवकों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के पास से 40 लाख रुपए के नकली नोट बरामद किए गए हैं, जिन्हें वे असली नोटों के साथ मिलाकर लोगों को ठगने की फिराक में थे.
डीसीपी जोन 3 हंसराज सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ युवक वॉट्सऐप और फेसबुक के जरिए नकली नोट बेचने का रैकेट चला रहे हैं. इसके बाद पुलिस ने सादी वर्दी में एक टीम बनाई और खुद को ग्राहक बनाकर युवकों से संपर्क किया. बातचीत में आरोपियों ने एक लाख असली नोट के बदले चार लाख नकली नोट देने की पेशकश की. सौदा तय होने के बाद पुलिस ने उन्हें पलासिया इलाके में बुलाया. तय समय पर महाराष्ट्र के जलगांव निवासी प्रथमेश येवलेकर और बड़वाह निवासी दीपक कौशल नकली नोटों से भरा बैग लेकर पहुंचे. दोनों को पुलिस ने रंगे हाथों दबोच लिया. जब उनके बैग की तलाशी ली गई तो लगभग बीस गड्डियों में छिपे नकली नोट पाए गए, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिए. यह नोट चिल्ड्रन बैंक ऑफ इंडिया के थे, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर बच्चों के खिलौनों में होता है. डीसीपी ने यह भी बताया कि आरोपी सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर ग्राहक बनाते थे संपर्क करने पर वे अपने ठिकाने लगातार बदलते रहते ताकि पकड़े न जा सकें. पूछताछ में सामने आया है कि प्रथमेश पहले से इस रैकेट में सक्रिय था और उसने ही दीपक को इसमें शामिल किया. मामले में डीसीपी ने यह भी बताया कि पुलिस को संदेह है कि यह कोई स्थानीय जाल नहीं बल्कि अंतरराज्यीय गिरोह हो सकता है. क्राइम ब्रांच और साइबर सेल को भी जांच में शामिल किया गया है. जल्द ही इस फर्जी करेंसी नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तह तक पुलिस पहुंचेगी.
ठगी का तरीका बेहद शातिराना
एडिशनल डीसीपी रामस्नेही मिश्रा ने बताया कि आरोपी नकली नोटों की गड्डी के ऊपर और नीचे असली नोट लगाते थे, ताकि पहली नजर में कोई शक न हो. सौदे के वक्त वे एक चिन्हित गड्डी दिखाते थे और फिर पुलिस या क्राइम ब्रांच का डर दिखाकर सौदा जल्दबाजी में पूरा कर भाग जाते थे. बाद में खरीदार को पता चलता कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है.
