आर एस पुरा,(वार्ता) जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्र में बंदूक के साये में जीवन यापन कर रहे निवासियों ने कहा कि हमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय सेना पर पूरा भरोसा है, लेकिन पाकिस्तान के इरादे हमेशा संदिग्ध रहे हैं।
केन्द्रशासित प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम होने के बाद अभी भी अपने घरों को लौटने के लिए तैयार नहीं हैं, उनका कहना है कि पाकिस्तान के इरादे हमेशा की तरह संदिग्ध रहे हैं।
पहलगाम में गत 22 अप्रैल को 27 पर्यटकों की नृशंस हत्या के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया जिसके बाद पाकिस्तान ने भारत के सामन घुटने टेके और संघर्ष विराम हुआ। सीमावर्ती लोगों का कहना है कि उन्हें ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय सशस्त्र बलों पर भरोसा है।’
केन्द्रशासित प्रदेश में पिछले एक पखवाड़े से सीमा पार से गोलाबारी का तनावपूर्ण दौर चल रहा है और सात मई को ऑपरेशन सिंदूर के बाद स्थिति और बिगड़ गई, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया।
हालांकि, कई दिनों की गोलाबारी के बाद भारत और पाकिस्तान शनिवार शाम को संघर्ष विराम पर सहमत हो गए, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले उन निवासियों को राहत मिली जो गोलीबारी में फंस गए थे और सुरक्षित स्थानों पर चले गए।
जिला प्रशासन ने सीमावर्ती निवासियों को जिन आश्रय गृहों में ठहराया है, वहां डॉक्टरों की एक टीम तैनात की है। सीमावर्ती इलाके में रहने वाले एक निवासी शाम लाल ने कहा, “हालांकि युद्ध विराम की घोषणा हो चुकी है, फिर भी हम अपने घरों में कैसे लौट सकते हैं? युद्ध विराम समझौते के बावजूद हमारे क्षेत्र में गोले गिरे, उन्हें किसने दागा? हमें पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है और हम अपने घरों को तभी लौटेंगे जब प्रशासन आधिकारिक तौर पर सीमाओं पर पूर्ण शांति की घोषणा करेगा।” सीमा पर रहने वाले एक अन्य व्यक्ति राम पाल ने कहा, “हम पाकिस्तान पर भरोसा नहीं कर सकते। हम कैसे कर सकते हैं? आखिरकार, दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम के बाद भी गोलाबारी हुई।”
स्थानीय निवासी ने कहा कि “इस बार हम ‘आर-या-पार’ की लड़ाई चाहते हैं। हम एक बार में पाकिस्तान का स्थायी इलाज चाहते हैं। हर दिन मरने के बजाय पाकिस्तान का पक्का इलाज होने के बाद ही शांति से रहेंगे।”
राम पाल ने कहा, “हम नहीं चाहते कि हमारी आने वाली पीढ़ियां भी हमारे जैसी ही स्थिति में रहें और हमेशा डर के साये में रहें। हम इसका पक्का समाधान चाहते हैं।” उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन आधिकारिक तौर पर उन्हें नहीं कहता, तब तक उनका परिवार वापस नहीं आएगा।
सीमावर्ती क्षेत्र के एक अन्य निवासी बालक राम ने कहा, “हम अपने परिवारों की जान जोखिम में नहीं डालेंगे। संघर्ष विराम के बावजूद श्रीनगर में ड्रोन हमले और जम्मू क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा के कुछ हिस्सों में भारी गोलाबारी देखी गई।”
आश्रय गृह में शरण लेने वाले दर्शन लाल ने कहा कि “हमारे लिए संघर्ष विराम का कोई मतलब नहीं है क्योंकि पाकिस्तान ने शनिवार रात को भी गोलाबारी जारी रखी। बहुत हो गया। इस बार, ‘आर या पार’ होना चाहिए या पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाया जाना चाहिए।”
सुचेतगढ़ के विधायक गारू राम भगत ने यूनीवार्ता से कहा कि “आर एस पुरा के सीमावर्ती क्षेत्रों में सभी चिन्हित आश्रय गृहों में व्यवस्थाएं कर दी गई हैं।” उन्होंने कहा कि छर्रे लगने से घायल मवेशियों का उपचार पशु चिकित्सालयों में किया जा रहा है।”
इस बीच, एक आश्रय गृह में सीमावर्ती निवासियों की चिकित्सा जांच करने वाले एक डॉक्टर ने कहा कि उनमें से कई, विशेष रूप से वृद्ध, तनावग्रस्त हैं। उनमें से कुछ को रक्तचाप की समस्या और मधुमेह है। डॉक्टर ने कहा “यहां तक कि बच्चे भी उच्च स्तर के तनाव में हैं। हमने उनके माता-पिता को उन्हें खेल या अन्य सह-पाठयक्रम गतिविधियों में शामिल करने की सलाह दी है।”
जम्मू-कश्मीर में सीमा पर हाल के दिनों में पहली बार शांति रही। अधिकारियों ने आज कहा कि रविवार रात में सीमा पार से गोला बारी की कोई घटना नहीं हुई।
