मुंह चिढ़ा रहा स्मार्ट सिटी का इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम

 

जबलपुर। शहर में लोगों को आपात स्थिति में सुविधाओं देने और बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था संचालित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) इन दिनों आमजन के कोई काम नहीं आ रहा है। जिससे तो ये लग रहा है कि इस सिस्टम की जबलपुर में स्थापना के लिए सिर्फ 40 करोड़ रुपए की होली ही खेली गई है। और शहर के आम नागरिकों को सुविधा देने के नाम पर एक बार फिर से धोखा दिया गया है।

विदित हो कि काफी समय पहले जबलपुर में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम की स्थापना की गई थी जिसके तहत आम जनता को घर बैठे आपातकालीन सुविधा के साथ शहर की हर गतिविधि की जानकारी देने का दावा किया गया था लेकिन इसमें से कुछ भी होता अभी तक तो नहीं दिखा है। जानकारी के अनुसार आईटीएमएस के संचालन की किसी ने भी ठीक ढंग से मॉनीटरिंग व संचालन की जिम्मेदारी भी नहीं उठाई है जिस कारण ये स्मार्ट सिटी का ये प्रोजेक्ट फीका पड़ चुका है। आपको बता दें कि आईटीएमएस के माध्यम से शहर के चौराहों की निगरानी भी की जानी थी, लेकिन हालात आज तो बिल्कुल विपरीत हैं। जिसका नतीजा है कि शहर के अधिकांश ट्रैफिक सिग्रल ही कई बार दिन-दिन भर बंद रहते हैंं। और शहर का ट्रैफिक बुरी तरह बिगड़ जाता है।

कुछ इस तरह की सुविधाएं रहीं शामिल

आपात स्थिति में नागरिकों को सहायता पहुंचाना, समय पर सार्वजनिक सेवाओं को मुहैया कराना, एम्बुलेंस, पुलिस और फायर ब्रिगेड मुहैया कराना, बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य, मौसम की जानकारी, ट्रैफिक मैनेजमेंट और कानून-व्यवस्था बनाने में पुलिस की मदद, एरिया बेस्ड डेवलपमेंट साइट की निगरानी, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, एरिया बेस्ड डेवलपमेंट में बिजली व्यवस्था, सिटी जीआईएस सेवा, सार्वजनिक पानी और बिजली सप्लाई को व्यवस्थित करना जैसी सुविधाओं को आईटीएमएस सेवा में शामिल किया गया था।

कंट्रोल सेंटर से नहीं जुड़ पाईं ऑनलाइन सुविधाएं

जानकारी के अनुसार कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से ऑनलाइन सुविधाएं नहीं जुड़ पाईं जिस कारण शहर के आम नागरिक सरकारी सुविधाओं के नए-नए प्रोजेक्ट्स से नहीं जुड़ पाए हैं। गौरतलब है कि आईटीएमएस की सुविधा से वृद्ध, विकलांग

को फायदा मिल सकता था। लेकिन विभागों की आपसी समन्वयता और उदासीनता के चलते आईटीएमएस का प्रोजेक्ट पानी में पड़ा फिरता नजर आ रहा है। वहीं दूसरी तरफ स्मार्ट सिटी जबलपुर के अधिकारी भी कोई रूचि दिखाते नजर नहीं आ रहे हैं और न ही अभी तक इसके संचालन को लेकर कोई प्लान तैयार किया गया है। नतीजा ये ही दिखाई दे रहा है कि करोड़ों की लागत से ना आईटीएमएस सिस्टम समय बीतने के बाद पूरी तरह ठप्प हो जाएगा।

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