जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व विभाग जबलपुर को निर्देशित किया है कि सिवनी के आष्टा स्थित अष्टभुजा माँ काली मंदिर के विस्तार वाले भाग को संरक्षित करने के संबंध में निर्णय लें। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत व जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने इसके लिये चार सप्ताह की मोहलत दी है।गढ़ा गोंडवाना संरक्षक संघ जबलपुर के संभागीय अध्यक्ष किशोरी लाल भलावी की ओर से अधिवक्ता बालकिशन चौधरी, एकता चौधरी एवं प्रशांत मिश्रा ने पक्ष रखा।
उन्होंने बताया कि लगभग 400 वर्ष पूर्व अष्टभुजा वाली माँ काली मंदिर का निर्माण गौड़ समाज के द्वारा कराया गया था। सर्वप्रथम 20 अक्टूबर 1922 को अंग्रेजों ने उक्त मंदिर को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संरक्षित करने का गजट पब्लीकेशन किया था। मंदिर व ग्राम पंचायत के चारों ओर 8 तालाब बने हुये हैं और बीच में मंदिर स्थापित है जिस कारण उक्त मंदिर का नाम आष्टा रखा गया है।
अंग्रेजो ने सन् 1840 में एक भवन का निर्माण कराया था जो जर्जर हालत में है। भू-माफियाओं की नजऱ उक्त भूमि पर है जिसे तोडक़र स्थानीय भू-माफिया उक्त जमीन पर कब्जा करना चाह रहे हैं। अंदर 8 कुंए बने हैं जो ऐतिहासिक महत्व के हैं। इसे भी उक्त मंदिर में समाहित कर उक्त मंदिर की सीमा की विस्तार करने की मांग संबंधी अभ्यावेदन आयुक्त संभाग जबलपुर, कलेक्टर एवं भारतीय पुरातत्व विभाग को भेजा गया था। कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
