जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने न्यूजीलैंड निवासी कुणाल बोरीकर सहित अन्य के विरुद्ध एफआईआर निरस्त करने से इंकार कर दिया है। मामला पत्नी द्वारा दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाए जाने संबंधित है।मामले की सुनवाई के दौरान अनावेदक आकांक्षा बोरीकर की ओर से अधिवक्ता अभय सोनी व निकेश विश्वकर्मा ने पक्ष रखा।
उन्होंने दलील दी कि बालाघाट निवासी आकांक्षा का विवाह कुणाल के साथ हुआ था। विवाह के समय आकांक्षा के पिता ने नगद व गहने आदि हैसियत के हिसाब से दहेज में दिए थे। इसके बावजूद कार व 10 लाख की अनुचित मांग रखी गई। दामाद कुणाल न्यूजीलैंड में पांच लाख रुपये मासिक की नौकरी करता है। इतने पर भी लालच कायम है। इसीलिए प्रताड़ना से तंग आकांक्षा ने एफआईआर दर्ज करा दी।
जिसे निरस्त कराने की मंशा से कुणाल के साथ उसके सास-ससुर प्रमिला व अनिल बोरीकर और देवर चेतन बोरीकर दो नंदों सहित हाईकोर्ट चले आए। हाईकोर्ट ने सभी तर्क सुनने के बाद नंदों के विरुद्ध एफआईआर निरस्त कर दी। जबकि सास-ससुर व देवर के विरुद्ध एफआईआर निरस्त करने से मना कर दिया। बहस के दौरान याचिकाकर्ता कुणाल सहित अन्य की ओर से कहा गया कि आकांक्षा से तलाक का केस दायर करने के कारण उसने दुर्भावनावश एफआईआर कराई है। इस पर अनावेदक के वकीलों ने स्पष्ट किया कि तलाक का मुकदमा एफआईआर दर्ज होने के बाद दायर किया गया है।
