तिरुवनंतपुरम, 28 अप्रैल (वार्ता) कांग्रेस के नेता और तिरुवनंतपुरम लोक सभा क्षेत्र के प्रतिनिधि शशि थरूर ने पहलगाम आतंकवादी हमले पर अपनी टिप्पणी को लेकर अपने विरुद्ध आक्षेप के लिए सोमवार को अपनी पार्टी के ही सदस्य उदित राज को आड़े हाथों लिया और भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) के साथ उनके पुराने संबंधों का उल्लेख किया।
श्री थरूर ने अपनी पार्टी के सदस्य की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर संवाददाताओं से कहा, “ मेरा मानना है कि जिस व्यक्ति ने यह कहा वह भाजपा का पूर्व सांसद है, इसलिए आप उससे पूछ सकते हैं, वह यह समझने में बेहतर योग्य है कि भाजपा के लिए कौन बोलता है…।”
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हर कोई जानता है कि मैं भाजपा का प्रवक्ता नहीं हूं। मैं किसी का प्रवक्ता नहीं हूं। मैं अपने लिए बोलता हूं।”
कांग्रेस नेता उदित राज ने पहलगाम आतंकी हमले को श्री थरूर की टिप्पणियों को लेकर आज ही उन पर निशाना साधा था और कांग्रेस पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल उठाया था।
श्री उदित राज ने कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि क्या थरूर कांग्रेस के लिए बोल रहे हैं या खुद को सत्तारूढ़ भाजपा के साथ जोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा था, “मैं शशि थरूर से पूछना चाहता हूं कि क्या वह कांग्रेस पार्टी में हैं या भाजपा में? क्या वह सुपर-भाजपाई बनने की कोशिश कर रहे हैं? ”
श्री थरूर ने पहलगाम में गत मंगलवार को हुए आतंकवादी हमले के संबंध में कहा था कि इसमें खुफिया तंत्र जैसी कुछ विफलताएं देखी जा सकती हैं । पर साथ ही उन्होंने इजरायल का उल्लेख किया जहां दुनिया की सबसे अच्छी माने जाने वाली खुफिया एजेंसी के बावजूद दो साल पहले हमास ने एक बड़ा धावा बोल दिया था।
श्री थरूर ने कहा था, “मुझे ऐसा लगता है कि जैसे इजराइल (उस हमले में खुफिया तंत्र की विफलता की ) जवाबदेही मांगने से पहले युद्ध के अंत तक प्रतीक्षा कर रहा है, उसी प्रकार हमें भी इस समय के संकट को देखना चाहिए और फिर सरकार से जवाबदेही की मांग करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खुफिया जानकारी के आधार पर न जाने आतंकवादी हमलों के कितने षडयंत्र विफल कर दिए गए है। हमें केवल उन हमलों के बारे में ही पता है जिन्हें हम विफल कर कर पाए।”
श्री उदित राज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब गुजरात में (मुख्यमंत्री) थे तो उन्होंने मुंबई में 26 नवंबर 2008 के हमले को तत्कालीन केंद्र सरकार की विफलता बताया था। उन्होंने कहा श्री थरूर को श्री मोदी से पूछना चाहिए था कि जब खुफिया, बीएसएफ, सीआरपीएफ केंद्र के पास है तो आतंकवादी कैसे आए।
