नयी दिल्ली 28 अप्रैल (वार्ता) चांदनी चौक से सांसद एवं कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता से राष्ट्रीय राजधानी आर्थिक एवं औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के लिए ‘दिल्ली आर्थिक विकास परिषद’का गठन करने का आग्रह किया है।
श्री गुप्ता ने सोमवार को मीडियाकर्मियों से कहा कि ऐसी परिषद न केवल दिल्ली में आर्थिक विकास को नयी दिशा देगी, बल्कि राजस्व के मामले में राष्ट्रीय राजधानी को आत्मनिर्भर बनाएगी। उन्होंने इस संबंध में आज मुख्यमंत्री को एक विस्तृत पत्र भेजा है। उन्होंने पत्र में कहा है कि पिछले लगभग दस वर्षों में दिल्ली में किसी भी प्रकार की ठोस आर्थिक या व्यापारिक नीति लागू नहीं हुई है, जिसके कारण यहां का व्यापार, उद्योग और सेवा क्षेत्र कई प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली को देश के अन्य महानगरों की तुलना में अग्रणी बनाना है, तो आर्थिक विकास के लिए एक समर्पित और व्यवस्थित योजना बनाना अत्यंत आवश्यक है। इस योजना से दिल्ली में ही रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
कैट के राष्ट्रीय महासचिव ने अपने पत्र में कहा है कि हाल ही में केंद्र सरकार के शहरी सुधार से संबंधित एक उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष केशव वर्मा ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। इस रिपोर्ट में शहरी विकास को आर्थिक सुदृढ़ता के साथ जोड़ने की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। समिति ने अपने सुझाव में प्रत्येक बड़े शहर में “शहर आर्थिक विकास परिषद’ के गठन का प्रस्ताव रखा है, ताकि शहर अपने स्तर पर आर्थिक संसाधन उत्पन्न कर आत्मनिर्भर बन सकें।
समिति ने प्रत्येक शहर में ब्राउनफील्ड डेवलपमेंट का सुझाव दिया है। लगभग हर शहर में विकास बिना किसी ठोस योजना के हुआ है, जिससे शहरों का चरित्र विकृत ही गया है। शहरों में कारोबारी गतिविधियां शहरों के बीच में ही हुई है, जबकि आबादी शहर तथा उसके आस पास तक फ़ैल चुकी हैं। इस वास्तविकता को देखते हुए शहरों के आर्थिक विकास को एक नई दिशा देने की ज़रूरत है, जिससे शहर आर्थिक रूप से स्वयं के संसाधनों पर निर्भर रह सकें और आर्थिक गतिविधियों को एक नया आयाम मिलें।
श्री खंडेलवाल ने कहा कि दिल्लीदेश के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्रों में से एक है, इसलिए इस पहल का सबसे पहले लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘दिल्ली आर्थिक विकास परिषद’ का गठन कर, नीति-निर्माण, निवेश प्रोत्साहन, व्यापार सुलभता, औद्योगिक पुनरुद्धार और सेवा क्षेत्र के विस्तार जैसे क्षेत्रों में समन्वित प्रयास किए जाएं, तो दिल्ली आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बन सकती है।
