उज्जैन: महाकालेश्वर की नगरी में देश-विदेश से जो श्रद्धालु देव दर्शन के लिए आते हैं वह शहर के होटल में रुकते हैं. होटल की जानकारी पुलिस को देना जरूरी होती है, ऐसे में पुलिस और होटल संचालकों के बीच कई बार विवाद की स्थिति उत्पन्न तो होती ही है, पुलिस को भी समय पर जानकारी नहीं पहुंच पाती है. यही कारण है कि पुलिस ने एक निजी कंपनी की सहायता से ऐप लॉन्च कर दिया है. एप वालों ने भारी भरकम 3500 से 10000 रुपए वार्षिक शुल्क रखा है जिसको लेकर होटल संचालकों ने मोर्चा खोल दिया है.
लाइए आपका रजिस्टर चेक कराइए, कौन यात्री यहां पर रुका है, उसके आधार कार्ड आईडी दीजिए, यदि पुलिस को जानकारी नहीं दी तो यह नियम के विरुद्ध है इस पर जुर्माना हो सकता है. आए दिन पुलिस इस तरह के जुमले महाकालेश्वर मंदिर के आसपास और अन्य क्षेत्रों की होटल संचालकों को सुनाती थी, अब एप लांच करने के बाद पुलिस का कहना है कि अब सारी जानकारी आप उक्त एप पर डालिए, यही से विवाद शुरू हो गया है.
होटलों में कंप्यूटर लैपटॉप नहीं
उज्जैन में सभी होटल पर कंप्यूटर या लैपटॉप नहीं है. कुछ यात्री गृह पर तो मोबाइल से भी काम नहीं होता है. सभी लोग मैनुअल काम करना ज्यादा सुरक्षित समझते हैं. ऑनलाइन एंट्री करना और सॉफ्टवेयर चलाना हर होटल वाले के लिए संभव नहीं है.
तो क्या ट्रेनिंग सेंटर खोले ?
कई सारी होटल पर तो स्टाफ भी प्रशिक्षित नहीं होता और न ही स्टाफ लंबे समय तक काम करता है. रोज एक नया कर्मचारी आता है. होटल संचालकों का अब कहना है कि ऐप लॉन्च होने के बाद क्या ट्रेनिंग सेंटर खोलना पड़ेगा?
दूसरे जिलों में सरलता
कई जिलों में ऑनलाइन एप्लीकेशन है जो डेस्कटॉप या मोबाइल एप के द्वारा चलती हैं, वहां पर सिर्फ शहर का नाम चेंज कर उज्जैन में शासन द्वारा लाया जा सकता है. इसके लिए एक बार वृहद मीटिंग रख दो या तीन प्रतिनिधि शासन से बात कर इसका समाधान कर सकते हैं.
पहले ऑफलाइन रिकॉर्ड होता था
पूर्व में उज्जैन की होटलों के द्वारा संबंधित थाने पर रुकने वाले का आफलाईन रिकॉर्ड दिया जाता था. दो-तीन दिन से महाकाल एवं अन्य थानों से आफलाईन रिकॉर्ड लेने से इनकार किया जा रहा है. संबंधित को आनलाईन रिपोर्ट भेजने का कहा जा रहा है.
नरसिंह घाट पर हुई बैठक
पुलिस रिपोर्ट ऑनलाइन सबमिट करने के संबंध में विगत दिवस एक बैठक नरसिंह घाट पर हुई थी, जिसमें सभी होटल संचालक मौजूद रहे. उपरोक्त बैठक के अनुसार प्राइवेट ग्रुप द्वारा जो ऐप लॉन्च किया गया है उसके माध्यम से रिपोर्ट ऑनलाइन प्रस्तुत करने के लिए उपलब्ध एप में होटल संचालक सम्मिलित नहीं हो रहे.
होटल संचालक खुद भी ला सकते हैं एप
होटल संचालकों ने कहा कि हम अपनी ओर से एप के लिए प्रयास करने जा रहे हैं जो हमारे लिए निशुल्क या न के बराबर शुल्क के माध्यम से कार्य करेगा.
चार लोगों की कमेटी
इस व्यवस्था हेतु चार लोगों की समिति बनाई गई है जिसमें जिसमें प्रशांत चंदेरी, राजेश रुद्राक्ष, प्रियांशु बैरागी औप चिंटू राजदेव को सम्मिलित किया गया है जो शीघ्र ही हमारे बीच इसका हल प्रस्तुत करेंगे.
इनका कहना है
हाल फिलहाल मैंने अभी चार्ज ही लिया है. मैं होटल संचालकों से लेकर संबंधित थाने से बात करता हूं, उसके बाद ही कोई निर्णय बता पाऊंगा.
राहुल देशमुख , सीएसपी कोतवाली
