
झाबुआ। झाबुआ निवासी जैन परिवार प्रदीप ओएल जैन अपने परिवार सहित कश्मीर की यात्रा पर गए हुए थे और पहलगाम हमले के 24 घंटे पहले वह परिवार सहित सकुलश लौट आए। प्रदीप जैन से चर्चा करने पर उन्होंने बताया की पहलगाम में जब हमला हुआ, तब वह परिवार के साथ कश्मीर के लाल चौक पर थे। उनकी यात्रा का टूर पहलगाम घटना वाले दिन ही तय किया गया था, लेकिन ईश्वरीय कृपा से पहलगाम हमले से एक दिन पहले 21 अप्रेल को ही वह वहां से सकुशल लौट आए। पहलगाम में हमला 22 अप्रेल को हुआ। जैन के अनुसार 21 अप्रेल को शायद वहां का मौसम खराब होने के कारण आंतकवादी हमला नहीं कर पाए। 22 अप्रेल को मौसम खुल गया और हमला हुआ।
कश्मीर में भारत सरकार की पहल सराहनीय
जैन ने बताया की श्रीनगर के कश्मीरी लोग बहुत मददगार है। इनका पूरा रोजगार पर्यटकों पर निर्भर है। आसपास के लोग बहुत गरीबी और विकट परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं। पूरे वर्ष इनका रोजगार भी नहीं होता है, भारत सरकार लगातार इनके जीवन स्तर को सुधारने में लगी हुई है, सड़क मार्ग भी बहुत बेहतर कर दिए गए हैं, जगह-जगह टनल बनाई गई है, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले। ऐसे हादसों से ये कश्मीरी लोग सॉफ्ट टारगेट बनते है, क्योंकि इनका रोजगार छीन जाता है और इनका माइंड वाश करके इन्हें आसानी से भटकाया जा सकता है।
